अन्वयः
AI
अरि-बलात् ऊनाः दूनाः निरेभाः भीताः ते तत्र शित-शर-अभीतम् शंकरम् शंकरम् बहु मेनिरे ।
English Summary
AI
They (the Ganas), distressed, diminished by the enemy's strength, without splendor, and afraid, highly esteemed Shankara (Shiva) there, who was both a bestower of good fortune and fearless of sharp arrows.
सारांश
AI
शत्रु सेना से पीड़ित और हाथियों से रहित वे भयभीत गण, तीक्ष्ण बाणों से रक्षा करने वाले कल्याणकारी शिव को पाकर स्वयं को धन्य मानने लगे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
दूना इति॥दूनाः शरतप्ताः।
ल्वादिभ्यः (अष्टाध्यायी ८.२.४४ ) इति निष्ठानत्वम्। अरिबलाच्छत्रुबलादूना ऊनबलाः।पञ्चमी विभक्ते (अष्टाध्यायी २.३.४२ ) इति पञ्चमी।निरेभा निःशब्दाः।कुतः। भीतास्त्रस्ता: । कुतः।यतः शितैस्तीक्ष्णैः शरैरभीता अभिव्याप्ताः। इणः कर्मणि क्तः। ते गणास्तत्र रणे शंकरमभयवचनेन सुखकरं शंकरं शिवं बहु यथा तथा मेनिरेऽमन्यन्त । पादाद्यन्तयमकम् ॥
पदच्छेदः
AI
| दूनाः | दून (√दू+क्त, १.३) | distressed |
| ते | तद् (१.३) | they |
| अरिबलादूनाः | अरिबल (५.१)–ऊन (१.३) | diminished by the enemy's strength |
| निरेभाः | निर्–रेभ (१.३) | without splendor |
| बहु | बहु | highly |
| मेनिरे | मेनिरे (√मन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they esteemed |
| भीताः | भीत (√भी+क्त, १.३) | afraid |
| शितशराभीतम् | शित–शर–अ–भीत (२.१) | him who was fearless of sharp arrows |
| शंकरम् | शंकर (२.१) | Shankara (Shiva) |
| तत्र | तत्र | there |
| शंकरम् | शम्–कर (२.१) | the bestower of good fortune |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दू | ना | स्ते | ऽरि | ब | ला | दू | ना |
| नि | रे | भा | ब | हु | मे | नि | रे |
| भी | ताः | शि | त | श | रा | भी | ताः |
| शं | क | रं | त | त्र | शं | क | रम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.