अन्वयः
AI
सेनान्याम् इति शासति (सति), अनेकधा गच्छतः तान् निषिध्य, अन्धकारिणा हसता किञ्चित् तत्र तस्थे ।
English Summary
AI
While the commander of the army (Shiva) was thus instructing, he, the enemy of Andhaka, forbade his Ganas who were leaving in various directions, and stood there, smiling a little.
सारांश
AI
सेनापति के ऐसा कहने पर, भागते हुए सैनिकों को रोककर शिवजी कुछ मुस्कुराते हुए वहीं युद्धक्षेत्र में ठहर गए।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
इतीति ॥ इतीत्थं सेनान्यां स्कन्दे शासत्याज्ञापयत्यनेकधा गच्छतः पलायमानांस्तान्गणान्निषिध्य निवार्यान्धकारिणा हरेण किंचिद्धसता तस्थे स्थितम् । भावे लिट् । निरौष्ठ्यः ॥ मुनीषुदहनातप्ताँल्लज्जया निविवृत्स्यतः । शिवः प्रह्लादयामास तान्निषेधहिमाम्बुना
पदच्छेदः
AI
| इति | इति | thus |
| शासति | शासत् (√शास्+शतृ, ७.१) | while instructing |
| सेनान्याम् | सेनानी (७.१) | the commander of the army |
| गच्छतः | गच्छत् (√गम्+शतृ, २.३) | those who were going |
| तान् | तद् (२.३) | them |
| अनेकधा | अनेकधा | in various directions |
| निषिध्य | निषिध्य (नि√सिध्+ल्यप्) | having forbidden |
| हसता | हसत् (√हस्+शतृ, ३.१) | by him who was smiling |
| किञ्चित् | किञ्चित् | a little |
| तत्र | तत्र | there |
| तस्थे | तस्थे (√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | stood |
| अन्धकारिणा | अन्धकारि (३.१) | by the enemy of Andhaka (Shiva) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | शा | स | ति | से | ना | न्यां |
| ग | च्छ | त | स्ता | न | ने | क | धा |
| नि | षि | ध्य | ह | स | ता | किं | चि |
| त्त | त्र | त | स्थे | ऽन्ध | का | रि | णा |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.