अन्वयः
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स-सत्त्व-रति-दे स-दरा-अमर्ष-नाशिनि त्वत्-अधिक-क-सन्नादे (रणे) नित्यम् रमकत्वम् अकर्षति ।
English Summary
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This complex verse describes the battle: 'In this battle, which gives delight to the brave, which destroys fear and anger, and where the joyous clamor is greater than any from you, it always attracts the quality of being captivating.'
सारांश
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वह युद्ध जो धैर्यवानों को उत्साह देता है, भय और क्रोध को नष्ट करता है और जिसमें योद्धाओं के भीषण सिंहनाद से पराक्रम बढ़ता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
ससत्वेति ॥ ससत्त्वानां सत्त्ववतां रतिदे रागप्रदे नित्यं सदराणां सभयानाममर्षनाशिनि क्रोधहारिणि त्वरयोत्साहेनाधिकं कसन्तो विकसन्तो नादा यत्र तस्मिन् रमयतीति रकमः। रमधातोर्वुञ्। तस्याकादेशः । तद्भावो रमकत्वम् । रणकर्मणा पररञ्जकत्वमकर्षत्यनुदति । वीराणां परस्परमुत्साहं रणकर्मणा स्फोरयतीत्यर्थः । अर्धभ्रमकः ॥
पदच्छेदः
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| ससत्त्वरतिदे | ससत्त्व–रति–द (७.१) | in that which gives delight to the brave |
| नित्यम् | नित्यम् | always |
| सदरामर्षनाशिनि | सदर–अमर्ष–नाशिन् (७.१) | in that which destroys fear and anger |
| त्वराधिककसन्नादे | त्वद्–अधिक–क–सन्नाद (७.१) | in which the sound of joy is greater than from you |
| रमकत्वम् | रमकत्व (२.१) | the quality of being captivating |
| अकर्षति | अकर्षति (आ√कृष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attracts |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | स | त्त्व | र | ति | दे | नि | त्यं |
| स | द | रा | म | र्ष | ना | शि | नि |
| त्व | रा | धि | क | क | स | न्ना | दे |
| र | म | क | त्व | म | क | र्ष | ति |
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