अन्वयः
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(महाहवे) निर्भिन्न-पातित-आश्वीय-निरुद्ध-रथ-वर्त्मनि हत-द्विप-नग-ष्ठ्यूत-रुधिर-अम्बु-नद-आकुले (पौरुषं निरस्तम्) ।
English Summary
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This verse, a single compound adjective describing the battlefield, continues the description: '...in that great battle, where the paths of chariots were blocked by pierced and felled cavalrymen, and which was filled with rivers of blood, like water, spewed by the slain mountain-like elephants.'
सारांश
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जहाँ मृत घोड़ों के गिरने से रथों का मार्ग रुक गया है और हाथियों के रक्त रूपी जल की धाराओं से रणभूमि अत्यंत व्याकुल हो गई है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
आहवं विशिनष्टि-विभिन्नानि विदारितान्यत एव पातितान्यश्वीयान्यश्वसमूहाश्च ते तथा ।
पूर्वकाल- (अष्टाध्यायी २.१.४९ ) इति समासः । तैरश्वसमूहैर्निरुद्धानि रथानां वर्त्मानि यस्मिम्स्तथोक्ते । वृन्दे त्वश्वीयमाश्ववत् इत्यमरः (अमरकोशः २.८.४८ ) । केशाश्वाभ्यां यञ्छावन्यतरस्याम् (अष्टाध्यायी ४.२.४८ ) इति छप्रत्ययः। हतास्ताडिता द्विपा गजा एव नगाः शैलाः । शैलवृक्षौ नगावगौ इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.२४ ) । तैः ष्ठ्यूतान्युज्झितानि। ष्ठीवतः कर्मणि क्तः। छ्वो: शूडनुनासिके च इत्यूठादेशः । तानि रुधिराण्येवाम्बूनि तेषां नदैःप्रवाहैराकुले व्याप्ते ॥
पदच्छेदः
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| निर्भिन्नपातिताश्वीयनिरुद्धरथवर्त्मनि | निर्भिन्न (निर्√भिद्+क्त)–पातित (√पत्+णिच्+क्त)–आश्वीय–निरुद्ध (नि√रुध्+क्त)–रथ–वर्त्मन् (७.१) | in which the chariot-paths were blocked by the pierced and felled cavalrymen |
| हतद्विपनगष्ठ्यूतरुधिराम्बुनदाकुले | हत (√हन्+क्त)–द्विप–नग–ष्ठ्यूत (√ष्ठिव्+क्त)–रुधिर–अम्बु–नद–आकुल (७.१) | which was filled with rivers of blood-water spewed by the slain mountain-like elephants |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र्भि | न्न | पा | ति | ता | श्वी | य |
| नि | रु | द्ध | र | थ | व | र्त्म | नि |
| ह | त | द्वि | प | न | ग | ष्ठ्यू | त |
| रु | धि | रा | म्बु | न | दा | कु | ले |
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