अन्वयः
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निशित-असि-रतः अभीकः अमरणा रुचा न्येजते । सारतः सु-आभासः भरवान् (सः) नः विरोधी न उत ।
English Summary
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This verse is a palindrome of syllables, reading the same forwards and backwards. It means: 'Delighting in his sharp sword, the fearless one shines with immortal splendor. In essence, that one, of great splendor and substance, is not our enemy, is he?'
सारांश
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तीक्ष्ण तलवार में लीन वह निर्भीक योद्धा अपनी अक्षय कांति से चमक रहा है। वह सारवान, प्रकाशमान और अत्यधिक प्रभावशाली है जो हमारा विरोधी नहीं है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
निशितेति ॥ हे अमरणा मरणरहिताः, निशितासिरतोऽतितीक्ष्णखड्गरतोऽभीको निर्भीको रुचा तेजसोपलक्षितः सुष्ट्वाभासत इति स्वाभासो रमणीयः। पचाद्यच् । उतात्यर्थमतिशयेन भरवान्। रणभरसहिष्णुरित्यर्थः ।
उत्तात्यर्थविकल्पयोः इति विश्वः। ईदृशो नोऽस्माकं विरोधी शत्रुः सारतो बलतो न न्येजते न कम्पते । न प्रचलतीत्यर्थः। एज कम्पने। लट्। अतो भवद्भिरपि स्थातव्यमेव । न चलितव्यमिति भावः ॥ नन्वयं न चलतीति कथं ज्ञायते । तत्राह
पदच्छेदः
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| निशितासिरतः | निशित (नि√शो+क्त)–असि–रत (√रम्+क्त, १.१) | one who delights in a sharp sword |
| अभीकः | अभीक (१.१) | fearless |
| न्येजते | न्येजते (नि√एज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shines |
| अमरणा | अमरण (३.१) | with immortal |
| रुचा | रुच् (३.१) | with splendor |
| सारतः | सारतस् | in essence |
| न | न | not |
| विरोधी | विरोधिन् (१.१) | an enemy |
| नः | अस्मद् (६.३) | our |
| स्वाभासो | सु–आभास (१.१) | of good splendor |
| भरवान् | भरवत् (१.१) | possessing substance |
| उत | उत | is it that? |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | शि | ता | सि | र | तो | ऽभी | को |
| न्ये | ज | ते | ऽम | र | णा | रु | चा |
| सा | र | तो | न | वि | रो | धी | नः |
| स्वा | भा | सो | भ | र | वा | नु | त |
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