अन्वयः
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(हे जनाः!) चतुरगाः सुरेभाः स्यन्दनाः न उ (सन्ति), वा अविपत्तयः (अपि न सन्ति) । (तथा) स्यन्दनाः न उ च तुरगाः (न सन्ति), (किन्तु) विपत्तयः सुरेभावाः (अतिशयेन शोभनाः सन्ति) ।
English Summary
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This is a yamaka verse with two meanings. First: 'There are no four-horsed, splendid chariots, nor are there any non-calamities (i.e., good fortunes).' Second, by re-parsing: 'There are neither chariots nor horses; our calamities, however, are very splendid (i.e., great and terrible).'
सारांश
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हमारे रथ, श्रेष्ठ घोड़े और हाथी जो कभी विजय के साधन थे, अब हमारी पराजय और वर्तमान विपत्ति का मुख्य कारण बन गए हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
स्यन्दना इति ॥ स्यन्दन्ते प्रद्रवन्तीति स्यन्दना जघनाः । स्यन्दना रथा नो सन्ति। नन्द्यादित्वाल्ल्युः । चतुरं गच्छन्तीति चतुरगाः । तुरगाश्चाश्वा नो सन्ति । सुरेभा शोभनबृंहणाः सुरेभा । वा सुरगजाश्च नो सन्ति। अविपत्तयो विपत्तिरहिताः। विपत्तयो वा विशिष्टाः पदातयो नो सन्ति । अतो न भेतव्यमिति भावः । अत्र पूर्वोत्तरार्धगतानां विशेषणानां चोद्देशोद्देश्यीभूतानां यथासंख्यसंबन्धानुक्रमाद्यथासंख्यालंकारो यमकेन संसृष्टः॥
पदच्छेदः
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| स्यन्दनाः | स्यन्दन (१.३) | chariots |
| न | न | not |
| उ | उ | indeed |
| चतुरगाः | चतुर्–ग (१.३) | four-horsed |
| सुरेभाः | सु–रेभ (१.३) | splendid |
| वा | वा | or |
| अविपत्तयः | अ–विपत्ति (१.३) | non-calamities (good fortunes) |
| स्यन्दनाः | स्यन्दन (१.३) | chariots |
| न | न | not |
| उ | उ | and |
| च | च | and |
| तुरगाः | तुरग (१.३) | horses |
| सुरेभावाः | सुरेभ–आव (१.३) | very splendid |
| विपत्तयः | विपत्ति (१.३) | calamities |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्य | न्द | ना | नो | च | तु | र | गाः |
| सु | रे | भा | वा | वि | प | त्त | यः |
| स्य | न्द | ना | नो | च | तु | र | गाः |
| सु | रे | भा | वा | वि | प | त्त | यः |
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