अन्वयः
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पातित-उत्तुङ्ग-माहात्म्यैः संहृत-आयत-कीर्तिभिः (युष्माभिः) गुर्वीम् काम-आपदम् हन्तुम् आवृत्ति-साहसम् कृतम् ।
English Summary
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"You, whose lofty greatness has been felled and widespread fame destroyed, have made this rash attempt to return to battle in order to overcome the great calamity of your desire to flee and live."
सारांश
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गौरव और यश को खोकर तुम्हारे द्वारा किया गया पलायन का यह साहस केवल आसन्न मृत्यु या बड़ी विपत्ति से बचने का एक असफल प्रयास मात्र है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
पातितेति । पातितं भ्रंशितमुत्तुङ्गमाहात्म्यमुन्नतभावो यैस्तैः संहृता आहृता आयता विस्तृताः कीर्ततो यैस्तैः। युष्माभिरिति शेषः । कां गुर्वीमापदं हन्तुम् । न कांचिदपीत्यर्थः । आवृत्तिर्युद्धान्निवृत्तिः। सैव साहसं कृतम् । अतः पापादन्यन्न किंचित्फलमस्तीति भावः । तदुक्तं मनुना—'यस्तु भीतः परावृत्तः सङ्ग्रामे हन्यते परैः। भर्तुर्यद्दुष्कृतं किंचित्तत्सर्वं प्रतिपद्यते ॥ यञ्चास्य सुकृतं किंचिदमुत्रार्थमुपार्जितम् । भर्ता तत्सर्वमादत्ते परावृत्तहतस्य तु ॥ इति ।
पदच्छेदः
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| पातित-उत्तुङ्ग-माहात्म्यैः | पातित–उत्तुङ्ग–माहात्म्य (३.३) | by you whose lofty greatness has been brought down |
| संहृत-आयत-कीर्तिभिः | संहृत–आयत–कीर्ति (३.३) | by you whose widespread fame has been destroyed |
| गुर्वीम् | गुर्वी (२.१) | great |
| काम-आपदम् | काम–आपद् (२.१) | the calamity of desire |
| हन्तुम् | हन्तुम् (√हन्+तुमुन्) | to destroy |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | made |
| आवृत्ति-साहसम् | आवृत्ति–साहस (१.१) | the rash act of returning |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पा | ति | तो | त्तु | ङ्ग | मा | हा | त्म्यैः |
| सं | हृ | ता | य | त | की | र्ति | भिः |
| गु | र्वीं | का | मा | प | दं | ह | न्तुं |
| कृ | त | मा | वृ | त्ति | सा | ह | सम् |
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