जयेन कच्चिद्विरमेदयं रणा-
द्भवेदपि स्वस्ति चराचराय वा ।
तताप कीर्णा नृपसूनुमार्गणै-
रिति प्रतर्काकुलिता पताकिनी ॥
जयेन कच्चिद्विरमेदयं रणा-
द्भवेदपि स्वस्ति चराचराय वा ।
तताप कीर्णा नृपसूनुमार्गणै-
रिति प्रतर्काकुलिता पताकिनी ॥
द्भवेदपि स्वस्ति चराचराय वा ।
तताप कीर्णा नृपसूनुमार्गणै-
रिति प्रतर्काकुलिता पताकिनी ॥
अन्वयः
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अयम् जयेन कच्चित् रणात् विरमेत्? वा चर-अचराय स्वस्ति अपि भवेत्? इति नृप-सूनु-मार्गणैः कीर्णा प्रतर्क-आकुलिता पताकिनी तताप ।
English Summary
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"Will he perhaps stop fighting once he has achieved victory? Or will there then be well-being for the entire world?" Thus distressed, the army, covered by the prince's arrows and agitated by such speculations, suffered greatly.
सारांश
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क्या यह राजकुमार युद्ध में विजयी होकर रुकेगा? क्या चराचर जगत का कल्याण होगा? अर्जुन के बाणों से संतप्त सेना इस प्रकार के अनेक संशयों से व्याकुल हो उठी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
जयेनेति ॥ कच्चिदयं रणाज्जयेन विरमेत् । अस्माञ्जित्वा कच्चिदयं युद्धमुपसंहरेदित्यर्थः । अपि चराचराय स्वस्ति भवेत्कच्चित् । अपि स्थावरजङ्गमं जगन्न विनश्येदित्यर्थः । अपिशब्दः संभावनायाम्। प्रार्थनायां लिङ् । इति प्रतर्का: पूर्वोक्ता ये वितर्कास्तैराकुलिता विह्वला । अत्र सहेतुकं विशेषणमाह—नृपसूनुमार्गणैरर्जुनबाणैः कीर्णा क्षिप्तां पताकिनी सेना। किरातपतेरिति शेषः। तताप तापं प्राप॥
पदच्छेदः
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| जयेन | जय (३.१) | with victory |
| कच्चित् | कच्चित् | perhaps |
| विरमेत् | विरमेत् (वि√रम् कर्तरि लिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he would stop |
| अयम् | इदम् (१.१) | this one |
| रणात् | रण (५.१) | from the battle |
| भवेत् | भवेत् (√भू कर्तरि लिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it would be |
| अपि | अपि | also |
| स्वस्ति | स्वस्ति | well-being |
| चर-अचराय | चर–अचर (४.१) | for the moving and non-moving |
| वा | वा | or |
| तताप | तताप (√तप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was distressed |
| कीर्णा | कीर्ण (√कॄ+क्त, १.१) | strewn |
| नृप-सूनु-मार्गणैः | नृप–सूनु–मार्गण (३.३) | by the arrows of the prince |
| इति | इति | thus |
| प्रतर्क-आकुलिता | प्रतर्क–आकुलित (१.१) | agitated by such speculations |
| पताकिनी | पताकिनी (१.१) | the army |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | ये | न | क | च्चि | द्वि | र | मे | द | यं | र | णा |
| द्भ | वे | द | पि | स्व | स्ति | च | रा | च | रा | य | वा |
| त | ता | प | की | र्णा | नृ | प | सू | नु | मा | र्ग | णै |
| रि | ति | प्र | त | र्का | कु | लि | ता | प | ता | कि | नी |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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