दिशः समूहन्निव विक्षिपन्निव
प्रभां रवेराकुलयन्निवानिलम् ।
मुनिश्चचाल क्षयकालदारुणः
क्षितिं सशैलां चलयन्निवेषुभिः ॥
दिशः समूहन्निव विक्षिपन्निव
प्रभां रवेराकुलयन्निवानिलम् ।
मुनिश्चचाल क्षयकालदारुणः
क्षितिं सशैलां चलयन्निवेषुभिः ॥
प्रभां रवेराकुलयन्निवानिलम् ।
मुनिश्चचाल क्षयकालदारुणः
क्षितिं सशैलां चलयन्निवेषुभिः ॥
अन्वयः
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क्षयकालदारुणः मुनिः दिशः समूहन् इव, रवेः प्रभां विक्षिपन् इव, अनिलम् आकुलयन् इव, इषुभिः सशैलां क्षितिं चलयन् इव चचाल।
English Summary
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The sage (Arjuna), terrible as the time of universal destruction, moved into action. He seemed to be sweeping up the directions, scattering the sun's light, churning the wind, and shaking the very earth with its mountains with his arrows.
सारांश
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प्रलयकाल के समान भयंकर वे मुनि अर्जुन अपने बाणों से पर्वतों सहित पृथ्वी को हिलाते हुए और सूर्य की प्रभा को मन्द करते हुए युद्धभूमि में विचरने लगे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
दिश इति ॥ क्षयकालः कल्पान्तकाल इव ।
संवर्तः प्रलयः कल्पः क्षयः कल्पान्तइत्यपि इत्यमरः (अमरकोशः १.४.२४ ) । दारुणो रौद्रो मुनिरर्जुन इषुभिर्बाणैर्दिशः समूहन्निवैकत्र समाहरन्निव। अन्यथा तासां पारदर्शनं न स्यादिति भावः । रवेः प्रभा विक्षिपन्निवाधःप्रक्षिप न्निव।अन्यथा सा कथं न दृश्यत इति भावः। तथानिलं वायुमाकुलयन्निषुभिरन्तराल आघूर्णयन्निव । तस्य तथा गतिविधातादिति भावः । सशैलां क्षितिं चलयन्निव कम्पयन्निव । तथा संक्षोभादिति भावः । चचाल गतिमकरोत् । सर्वत्रेवशब्द उत्प्रेक्षायाम् ॥
पदच्छेदः
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| दिशः | दिश् (२.३) | the directions |
| समूहन् | समूहत् (सम्√ऊह्+शतृ, १.१) | sweeping up |
| इव | इव | as if |
| विक्षिपन् | विक्षिपत् (वि√क्षिप्+शतृ, १.१) | scattering |
| इव | इव | as if |
| प्रभाम् | प्रभा (२.१) | the light |
| रवेः | रवि (६.१) | of the sun |
| आकुलयन् | आकुलयत् (√आकुल+णिच्+शतृ, १.१) | churning |
| इव | इव | as if |
| अनिलम् | अनिल (२.१) | the wind |
| मुनिः | मुनि (१.१) | The sage (Arjuna) |
| चचाल | चचाल (√चल् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | moved |
| क्षयकालदारुणः | क्षयकाल–दारुण (१.१) | terrible as the time of destruction |
| क्षितिम् | क्षिति (२.१) | the earth |
| सशैलाम् | सशैला (२.१) | with its mountains |
| कालयन् | कालयत् (√चल्+णिच्+शतृ, १.१) | shaking |
| इव | इव | as if |
| इषुभिः | इषु (३.३) | with his arrows |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | शः | स | मू | ह | न्नि | व | वि | क्षि | प | न्नि | व |
| प्र | भां | र | वे | रा | कु | ल | य | न्नि | वा | नि | लम् |
| मु | नि | श्च | चा | ल | क्ष | य | का | ल | दा | रु | णः |
| क्षि | तिं | स | शै | लां | च | ल | य | न्नि | वे | षु | भिः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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