निषण्णमापत्प्रतिकारकारणे
शरासने धैर्य इवानपायिनि ।
अलङ्घनीयं प्रकृतावपि स्थितं
निवातनिष्कम्पमिवापगापतिम् ॥
निषण्णमापत्प्रतिकारकारणे
शरासने धैर्य इवानपायिनि ।
अलङ्घनीयं प्रकृतावपि स्थितं
निवातनिष्कम्पमिवापगापतिम् ॥
शरासने धैर्य इवानपायिनि ।
अलङ्घनीयं प्रकृतावपि स्थितं
निवातनिष्कम्पमिवापगापतिम् ॥
अन्वयः
AI
आपत्प्रतिकारकारणे अनपायिनि धैर्य इव शरासने निषण्णं प्रकृतौ अपि स्थितं निवातनिष्कम्पम् आपगापतिम् इव अलङ्घनीयं (तं ददृशुः)।
English Summary
AI
They saw him, who was resting on his bow—the means of repelling calamity—as one relies on unfailing courage. Though calm by nature, he was unassailable, like the ocean, which is motionless in a windless state.
सारांश
AI
अपने अक्षय धैर्य और धनुष के सहारे स्थित अर्जुन प्राकृतिक रूप से शांत किंतु अलंघनीय समुद्र की भाँति अडिग खड़े थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
निषण्णमिति ॥ पुनश्च । आपदां प्रतिकारस्य कारणे साधनेऽनपायिनि स्थिरे शरा सन् एवंभूते धैर्य इव निषण्णं स्थितं प्रकृतौ स्वभावे स्थितमपि । निर्विकारमपीत्यर्थः। अत एवालङ्घनीयमनतिक्रमणीयमत एव निवातनिष्कम्पं वाताभावान्निश्चलम् ।
निवातावाश्रयावातौ इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.९१ ) । आपगापतिं समुद्रमिव स्थितम् ॥
पदच्छेदः
AI
| निषण्णम् | निषण्ण (नि√सद्+क्त, २.१) | resting on |
| आपत्प्रतिकारकारणे | आपद्–प्रतिकार–कारण (७.१) | on the means of repelling calamity |
| शरासने | शरासन (७.१) | on the bow |
| धैर्य | धैर्य (७.१) | on courage |
| इव | इव | like |
| अनपायिनि | अनपायिन् (७.१) | on the unfailing |
| अलङ्घनीयम् | अलङ्घनीय (√लङ्घ्+अनीयर्, २.१) | unassailable |
| प्रकृतौ | प्रकृति (७.१) | by nature |
| अपि | अपि | even |
| स्थितम् | स्थित (√स्था+क्त, २.१) | being |
| निवातनिष्कम्पम् | निवात–निष्कम्प (२.१) | motionless in a windless state |
| इव | इव | like |
| आपगापतिम् | आपगापति (२.१) | the lord of rivers (the ocean) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | ष | ण्ण | मा | प | त्प्र | ति | का | र | का | र | णे |
| श | रा | स | ने | धै | र्य | इ | वा | न | पा | यि | नि |
| अ | ल | ङ्घ | नी | यं | प्र | कृ | ता | व | पि | स्थि | तं |
| नि | वा | त | नि | ष्क | म्प | मि | वा | प | गा | प | तिम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.