पृथूरुपर्यस्तबृहल्लतातति-
र्जवानिलाघूर्णितशालचन्दना ।
गणाधिपानां परितः प्रसारिणी
वनान्यवाञ्चीव चकार संहतिः ॥
पृथूरुपर्यस्तबृहल्लतातति-
र्जवानिलाघूर्णितशालचन्दना ।
गणाधिपानां परितः प्रसारिणी
वनान्यवाञ्चीव चकार संहतिः ॥
र्जवानिलाघूर्णितशालचन्दना ।
गणाधिपानां परितः प्रसारिणी
वनान्यवाञ्चीव चकार संहतिः ॥
अन्वयः
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पृथूरुपर्यस्तबृहल्लताततिः जवादिलाघूर्णितशालचन्दना परितः प्रसारिणी गणाधिपानां संहतिः वनानि अवाची इव चकार।
English Summary
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The dense mass of the Gana chiefs, spreading all around, made the forests seem to bend downwards. Their movement threw down large clusters of creepers from the broad trees and shook the Sal and Sandalwood trees as if by a strong wind.
सारांश
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लताओं और वृक्षों को झकझोरती हुई गणपतियों की वह सेना चारों ओर इस प्रकार फैल गई कि उसने पूरे वन को मानो नीचे झुका दिया हो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
पृथ्विति ॥ पृथुभिर्विशालैरूरुभिः सक्थिभिः पर्यस्ताः क्षिप्ता बृहत्यो लताततयो यया सा जवानिलेन वेगमारुतेनाघूर्णिता भ्रमिता शाला: सर्जतरवश्चन्दनानि च यया सा। 'प्राकारवृक्षयोः शाल: शालः सर्जतरुः स्मृतः' इति शाश्वतः। परितः सर्वत्र प्रसारिणी प्रसरणशीला गणाधिपानां संहतिः समूहो वनान्यवाञ्चि-नीव चकारेत्युत्प्रेक्षा । अवाञ्चत्यधोभवति । अवपूर्वादञ्चते: क्विप् । स्यादवाङप्यधोमुखः' इत्यमरः॥ अथाष्टभिः श्लोकैरर्जुनं विशेषयन्गणानां तदभियोगमाह-तत इत्यादिना । ततः सदर्पं प्रतनुं तपस्यया मदस्त्रुतिक्षाममिवैकवारणम् । परिज्वलन्तं निधनाय भूभृतां दहन्तमाशा इव जातवेदसम्
पदच्छेदः
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| पृथूरुपर्यस्तबृहल्लताततिः | पृथु–उपरि–अस्त (√अस्+क्त)–बृहत्–लता–तति (१.१) | which threw down large clusters of creepers from the broad (trees) |
| जवानिलाघूर्णितशालचन्दना | जव–अनिल–आघूर्णित (आ√घूर्ण्+क्त)–शाल–चन्दन (१.१) | which shook the Sal and Sandalwood trees as if by a strong wind |
| गणाधिपानाम् | गण–अधिप (६.३) | of the Gana chiefs |
| परितः | परितः | all around |
| प्रसारिणी | प्रसारिन् (प्र√सृ+णिनि, १.१) | spreading |
| वनानि | वन (२.३) | the forests |
| अवाची | अवाच् (२.३) | downwards |
| इव | इव | as if |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
| संहतिः | संहति (१.१) | the dense mass |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पृ | थू | रु | प | र्य | स्त | बृ | ह | ल्ल | ता | त | ति |
| र्ज | वा | नि | ला | घू | र्णि | त | शा | ल | च | न्द | ना |
| ग | णा | धि | पा | नां | प | रि | तः | प्र | सा | रि | णी |
| व | ना | न्य | वा | ञ्ची | व | च | का | र | सं | ह | तिः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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