इतीरिताकूतमनीलवाजिनं
जयाय दूतः प्रतितर्ज्य तेजसा ।
ययौ समीपं ध्वजिनीमुपेयुषः
प्रसन्नरूपस्य विरूपचक्षुषः ॥
इतीरिताकूतमनीलवाजिनं
जयाय दूतः प्रतितर्ज्य तेजसा ।
ययौ समीपं ध्वजिनीमुपेयुषः
प्रसन्नरूपस्य विरूपचक्षुषः ॥
जयाय दूतः प्रतितर्ज्य तेजसा ।
ययौ समीपं ध्वजिनीमुपेयुषः
प्रसन्नरूपस्य विरूपचक्षुषः ॥
अन्वयः
AI
इति ईरित-आकूतम् दूतः तेजसा अनील-वाजिनम् प्रतितर्ज्य, जयाय ध्वजिनीम् उपेयुषः प्रसन्न-रूपस्य विरूप-चक्षुषः समीपम् ययौ ।
English Summary
AI
Having thus conveyed his intention and challenged Arjuna (the one with white horses) with his brilliance, the messenger, for the sake of victory, went near Shiva (the one with an odd number of eyes), who had approached with his army and had a gracious appearance.
सारांश
AI
दूत अर्जुन को चुनौती देकर अपने स्वामी शिव (किरात वेशधारी) के पास लौट गया, जो सेना के साथ प्रसन्न मुद्रा में खड़े थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
इतीति ॥ इतीत्थमीरिताकूतमुक्ताभिप्रायमनीलवाजिनं श्वेताश्वमर्जुनं दूतो जयाय तेजसा प्रतापेन प्रतितर्ज्य । अस्मानजित्वा क्व गमिष्यसीति भीषयित्वेत्यर्थः । ध्वजिनीमुपेयुषः सेनासंगतस्य प्रसन्नरूपस्य । अर्जुनं प्रतीति शेषः । विरूपचक्षुषस्त्र्यम्बकस्य समीपं ययौ ।
पदच्छेदः
AI
| इति | इति | thus |
| ईरिताकूतम् | ईरित–आकूत (२.१) | having conveyed his intention |
| अनीलवाजिनम् | अनील–वाजिन (२.१) | Arjuna |
| जयाय | जय (४.१) | for victory |
| दूतः | दूत (१.१) | the messenger |
| प्रतितर्ज्य | प्रतितर्ज्य (प्रति√तर्ज्+ल्यप्) | having challenged |
| तेजसा | तेजस् (३.१) | with his brilliance |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | went |
| समीपम् | समीप (२.१) | near |
| ध्वजिनीम् | ध्वजिनी (२.१) | with his army |
| उपेयुषः | उपेयिवस् (उप√इ+क्वसु, ६.१) | of the one who had approached |
| प्रसन्नरूपस्य | प्रसन्न–रूप (६.१) | of the one with a gracious appearance |
| विरूपचक्षुषः | विरूप–चक्षुस् (६.१) | of the one with an odd number of eyes (Shiva) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ती | रि | ता | कू | त | म | नी | ल | वा | जि | नं |
| ज | या | य | दू | तः | प्र | ति | त | र्ज्य | ते | ज | सा |
| य | यौ | स | मी | पं | ध्व | जि | नी | मु | पे | यु | षः |
| प्र | स | न्न | रू | प | स्य | वि | रू | प | च | क्षु | षः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.