असिः शरा वर्म धनुश्च नोच्चकै-
र्विविच्य किं प्रार्थितमीश्वरेण ते ।
अथास्ति शक्तिः कृतमेव याच्ञया
न दूषितः शक्तिमतां स्वयंग्रहः ॥
असिः शरा वर्म धनुश्च नोच्चकै-
र्विविच्य किं प्रार्थितमीश्वरेण ते ।
अथास्ति शक्तिः कृतमेव याच्ञया
न दूषितः शक्तिमतां स्वयंग्रहः ॥
र्विविच्य किं प्रार्थितमीश्वरेण ते ।
अथास्ति शक्तिः कृतमेव याच्ञया
न दूषितः शक्तिमतां स्वयंग्रहः ॥
अन्वयः
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ते ईश्वरेण असिः शराः वर्म धनुः च उच्चकैः न विविच्य किम् प्रार्थितम्? अथ शक्तिः अस्ति (चेत्), याच्ञया कृतम् एव । शक्तिमताम् स्वयंग्रहः न दूषितः (भवति) ।
English Summary
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"Why was the sword, arrows, armor, and bow not specifically requested by your master? If you have the power, then enough with begging! For the powerful, taking things for oneself is not considered a fault."
सारांश
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तुम्हारे स्वामी ने तलवार, बाण, कवच या धनुष में से क्या माँगा है? यदि शक्ति है तो याचना व्यर्थ है, क्योंकि समर्थ पुरुषों द्वारा स्वयं ग्रहण करना दोषपूर्ण नहीं माना जाता।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
असिरिति । असिः खड्ग: शरा वर्म कवचमुच्चकैरुत्कृष्टं धनुश्च धनुर्वा ते तवेश्वरेण स्वामिना विविच्यैकैकशो विभज्य किं न प्रार्थितं न याचितम् । येन प्रयोजनं तद्दास्यामीति भावः । नपुंसकैकशेषः । अथास्य वीराभिमानिनो नृपस्य शक्तिरस्ति । चेदिति शेषः। याच्ञया कृतमेवालमेव । साध्याभावान्न याचितव्यमेवेत्यर्थः । गम्यमानक्रियापेक्षया करणत्वात्तृतीयेत्युक्तं प्राक् । कृतमिति निषेधार्थमव्ययम् । यतः शक्तिमतां स्वयंग्रहो बलाद्ग्रहणं न दूषितः । किंतु भूषणमेव वीराणामिति भावः ॥
राघवप्लवगराजयोरिव इत्यादिनोपदिष्टं सख्यं प्रत्याचष्टे
पदच्छेदः
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| असिः | असि (१.१) | the sword |
| शराः | शर (१.३) | arrows |
| वर्म | वर्मन् (१.१) | armor |
| धनुः | धनुस् (१.१) | and bow |
| च | च | and |
| न | न | not |
| उच्चकैः | उच्चकैस् | specifically |
| विविच्य | विविच्य (वि√विच्+ल्यप्) | having distinguished |
| किम् | किम् | why |
| प्रार्थितम् | प्रार्थित (प्र√अर्थ्+क्त, १.१) | was requested |
| ईश्वरेण | ईश्वर (३.१) | by your master |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| अथ | अथ | if |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | you have |
| शक्तिः | शक्ति (१.१) | the power |
| कृतम् | कृत (१.१) | enough |
| एव | एव | indeed |
| याच्ञया | याच्ञा (३.१) | with begging |
| न | न | not |
| दूषितः | दूषित (√दुष्+णिच्+क्त, १.१) | is a fault |
| शक्तिमताम् | शक्तिमत् (६.३) | for the powerful |
| स्वयंग्रहः | स्वयंग्रह (१.१) | taking for oneself |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सिः | श | रा | व | र्म | ध | नु | श्च | नो | च्च | कै |
| र्वि | वि | च्य | किं | प्रा | र्थि | त | मी | श्व | रे | ण | ते |
| अ | था | स्ति | श | क्तिः | कृ | त | मे | व | या | च्ञ | या |
| न | दू | षि | तः | श | क्ति | म | तां | स्व | यं | ग्र | हः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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