सज्यं धनुर्वहति योऽहिपतिस्थवीयः
स्थेयाञ्जयन्हरितुरङ्गमकेतुलक्ष्मीम् ।
अस्यानुकूलय मतिं मतिमन्ननेन
सख्या सुखं समभियास्यसि चिन्तितानि ॥
सज्यं धनुर्वहति योऽहिपतिस्थवीयः
स्थेयाञ्जयन्हरितुरङ्गमकेतुलक्ष्मीम् ।
अस्यानुकूलय मतिं मतिमन्ननेन
सख्या सुखं समभियास्यसि चिन्तितानि ॥
स्थेयाञ्जयन्हरितुरङ्गमकेतुलक्ष्मीम् ।
अस्यानुकूलय मतिं मतिमन्ननेन
सख्या सुखं समभियास्यसि चिन्तितानि ॥
अन्वयः
AI
मतिमन्, यः अहि-पति-स्थवीयः स्थेयान् हरित्-तुरङ्गम-केतु-लक्ष्मीम् जयन् सज्यम् धनुः वहति, अस्य मतिम् अनुकूलय । अनेन सख्या (त्वम्) चिन्तितानि सुखम् समभियास्यसि ।
English Summary
AI
O wise one, make favorable the mind of him who, being firmer and conquering the splendor of Arjuna's banner, carries a strung bow thicker than Shesha, the king of serpents. With him as a friend, you will easily attain all your desired goals.
सारांश
AI
शेषनाग के समान विशाल धनुष धारण करने वाले और इंद्र के अश्व जैसी शोभा वाले इन राजा को प्रसन्न करो। इनकी मित्रता से तुम्हारे समस्त मनोरथ सिद्ध होंगे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
सज्यमिति ॥ स्थेयान्स्थिरतरः ।
प्रियस्थिर- (अष्टाध्यायी ६.४.१५७ ) इत्यादिना स्थादेशः । यश्चमूपतिर्हरितुरंगमकेतोरिन्द्रध्वजस्य लक्ष्मीं शोभां जयन्।अहिपतिः शेष इव स्थवीयः स्थूलतरम्। स्थूलदूर- (अष्टाध्यायी ६.४.१५६ ) इत्यादिना पूर्वगुणयणादिपरलोपौ । सह ज्यया सज्यं धनुर्वहति । हे मतिमन्, अस्य चमूपतेर्मतिमनुकूलयानुकूलां कुरु । सख्यं कुर्वित्यर्थः । मतिमत्तायाः फलमेतदिति भावः । कुतः । सख्यानेन चमूपतिना हेतुना सुखमक्लेशेन चिन्तितानि मनोरथान्समभियास्यसि प्राप्स्यसि । वसन्ततिलकावृत्तम्
पदच्छेदः
AI
| सज्यम् | सज्य (२.१) | strung |
| धनुः | धनुस् (२.१) | bow |
| वहति | वहति (√वह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he carries |
| यः | यद् (१.१) | who |
| अहिपतिस्थवीयः | अहिपति–स्थवीयस् (२.१) | thicker than the lord of serpents |
| स्थेयान् | स्थेयस् (१.१) | firmer |
| जयन् | जयत् (√जि+शतृ, १.१) | conquering |
| हरितुरङ्गमकेतुलक्ष्मीम् | हरित्–तुरङ्गम–केतु–लक्ष्मी (२.१) | the splendor of the banner of one with green horses (Arjuna) |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| अनुकूलय | अनुकूलय (√अनुकूलय् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | make favorable |
| मतिम् | मति (२.१) | the mind |
| मतिमन् | मतिमत् (८.१) | O wise one |
| अनेन | इदम् (३.१) | with this |
| सख्या | सखि (३.१) | friend |
| सुखम् | सुखम् | easily |
| समभियास्यसि | समभियास्यसि (सम्+अभि√या कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will attain |
| चिन्तितानि | चिन्तित (√चिन्त्+क्त, २.३) | your desired goals |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | ज्यं | ध | नु | र्व | ह | ति | यो | ऽहि | प | ति | स्थ | वी | यः |
| स्थे | या | ञ्ज | य | न्ह | रि | तु | र | ङ्ग | म | के | तु | ल | क्ष्मीम् |
| अ | स्या | नु | कू | ल | य | म | तिं | म | ति | म | न्न | ने | न |
| स | ख्या | सु | खं | स | म | भि | या | स्य | सि | चि | न्ति | ता | नि |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.