अन्वयः
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अर्थपतिषु शक्तिः स्वयंग्रहम् कारयति वा निरत्ययम् प्रेम (कारयति) । इदम् कारण-द्वयम् निरस्यतः अधिक-बले प्रार्थना विपत्-फला (भवति) ।
English Summary
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Towards the powerful, one can either use force or show sincere affection to get what one wants. For one who rejects both these methods, making a request to a superior in strength results only in disaster.
सारांश
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राजाओं में शक्ति या तो स्वेच्छाचार उत्पन्न करती है या अटूट प्रेम। इन दोनों कारणों की उपेक्षा कर शक्तिशाली से याचना करना विपत्ति का कारण बनता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
शक्तिरिति ॥ अर्थपतिषु विषये शक्तिः सामर्थ्यं स्वयंग्रहं स्वाम्यनुज्ञां विना ग्रहणं कारयति । यद्वा निरत्ययमपराधेऽप्यविकारि निर्बाधं प्रेम कर्तृ स्वयंग्रहं कारयति । प्रबलः प्रियो वा परस्य धनं स्वयं गृह्णातीत्यर्थः। अन्यथा दोषमाहइदं पूर्वोक्तं कारणद्वयं निरस्यतस्त्यजतः । पुंस इति शेषः । अधिकबले प्रबले विषये प्रार्थना तद्धनजिघृक्षा विपत्फलानर्थफलका । अशक्तस्याप्रियस्य सतः प्रबलधनग्रहणाशा फणिशिरोमणिग्रहणसाहसवदनर्थाय कल्पत इत्यर्थः ॥ ननु शस्त्रार्थसंपत्त्या शक्तत्वाभिधानः । तत्राह
पदच्छेदः
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| शक्तिः | शक्ति (१.१) | power |
| अर्थपतिषु | अर्थपति (७.३) | towards lords of power |
| स्वयंग्रहम् | स्वयंग्रहम् | taking by force |
| प्रेम | प्रेमन् (१.१) | affection |
| कारयति | कारयति (√कृ +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | causes |
| वा | वा | or |
| निरत्ययम् | निरत्यय (२.१) | sincere |
| कारणद्वयम् | कारण–द्वय (२.१) | the pair of reasons |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| निरस्यतः | निरस्यत् (निर्√अस्+शतृ, ६.१) | of one who rejects |
| प्रार्थना | प्रार्थना (१.१) | a request |
| अधिकबले | अधिक–बल (७.१) | towards one of superior strength |
| विपत्फला | विपत्–फला (१.१) | resulting in disaster |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | क्ति | र | र्थ | प | ति | षु | स्व | यं | ग्र | हं |
| प्रे | म | का | र | य | ति | वा | नि | र | त्य | यम् |
| का | र | ण | द्व | य | मि | दं | नि | र | स्य | तः |
| प्रा | र्थ | ना | धि | क | ब | ले | वि | प | त्फ | ला |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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