अन्वयः
AI
तत्, तदीय-विशिख-अतिसर्जनात् यदृच्छया आगतम् (इदं वैरं) गुरु अस्तु । राघव-प्लवगराजयोः इव वाम् इतरेतर-आश्रयम् प्रेम युक्तम् ।
English Summary
AI
Therefore, let this conflict, which arose by chance from the shooting of his arrow, be a significant event. Like the friendship between Rama and Sugriva, a mutually dependent bond between you two is fitting.
सारांश
AI
राजा के बाण को लौटाने से आप दोनों के मध्य राम और सुग्रीव जैसा निस्वार्थ और प्रगाढ़ प्रेम स्थापित हो सकता है, जो एक-दूसरे के लिए कल्याणकारी होगा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तदिति ॥ तत्तस्मात्तदीयविशिखस्यातिसर्जनात्प्रत्यर्पणाद्वां युवयोः ।
षष्ठीचतुर्थी द्वितीयास्थयोर्वां नौ इति वामादेशः । राघवप्लवगराजयो रामसुग्रीवयोरिव यदृच्छया दैवादागतं गुरु महद्युक्तमनुरूपमितरेतराश्रयमन्योन्यविषयं प्रेम सख्यमस्तु ॥ ननु शरलोभान्मिथ्याभियुज्यस इत्याह-~
पदच्छेदः
AI
| तत् | तत् | therefore |
| तदीयविशिखातिसर्जनात् | तदीय–विशिख–अतिसर्जन (५.१) | from the discharge of his arrow |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
| वाम् | युष्मद् (६.२) | of you two |
| गुरु | गुरु (१.१) | great/important |
| यदृच्छयागतम् | यदृच्छया–आगत (आ√गम्+क्त, १.१) | that which has come by chance |
| राघवप्लवगराजयोः | राघव–प्लवगराज (६.२) | of Rama and the king of monkeys (Sugriva) |
| इव | इव | like |
| प्रेम | प्रेमन् (१.१) | friendship |
| युक्तम् | युक्त (√युज्+क्त, १.१) | is proper |
| इतरेतराश्रयम् | इतरेतर–आश्रय (१.१) | mutually dependent |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त्त | दी | य | वि | शि | खा | ति | स | र्ज | ना |
| द | स्तु | वां | गु | रु | य | दृ | च्छ | या | ग | तम् |
| रा | घ | व | प्ल | व | ग | रा | ज | यो | रि | व |
| प्रे | म | यु | क्त | मि | त | रे | त | रा | श्र | यम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.