सारांश
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आपकी शांति, विनम्रता, तेज और पवित्र तप आपके देवताओं जैसे महान और निष्कलंक वंश का परिचय दे रहे हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
शान्ततेति । शान्तता बहिरनौद्धत्यं ते तव विनययोग्यनौद्धत्ययुक्तं मानसं कर्म प्राह नु ब्रूते खलु । तथा भूरि बहु धाम तेजो यस्मिंस्तत्तपः कर्तृ विमलं संप्रदायशुद्धं श्रुतं प्राह । किं च । द्यौर्दिवं वौको येषां तेषां दिवौकसां देवानाम् । पृषोदरादित्वात्साधुः।
दिवं स्वर्गेऽन्तरिक्षे च इति विश्वः । सदृशी तुल्याकृतिर्मूर्तिरवदातं शुद्धमन्ववायं वंशं प्राह । वंशोऽन्ववायःसंतानः इत्यमरः । शान्त्यादिभिर्लिङ्गैर्विनयादयोऽनुमीयन्ते। अन्यथा तदसंभवादिति भावः ॥ दीपितस्त्वमनुभावसंपदा गौरवेण लघयन्महीभृतः। राजसे मुनिरपीह कारयन्नाधिपत्यमिव शातमन्यवम्
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शा | न्त | ता | वि | न | य | यो | गि | मा | न | सं |
| भू | रि | धा | म | वि | म | लं | त | पः | श्रु | तम् |
| प्रा | ह | ते | नु | स | दृ | शी | दि | वौ | क | सा |
| म | न्व | वा | य | म | व | दा | त | मा | कृ | तिः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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