अन्वयः
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घनपोत्रविदीर्णशालमूलः निबिडस्कन्धनिकाषरुग्णवप्रः अयम् एकचरः समराय माम् आजुहूषमाणः इव अभिवर्तते।
English Summary
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'This solitary wanderer, which has torn up the roots of Shala trees with its hard snout and broken river banks by rubbing its dense shoulders, approaches me as if desiring to challenge me to battle.'
सारांश
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अर्जुन ने देखा कि वह वराह अपने कठोर थूथन से शाल वृक्षों को उखाड़ता और टीलों को ध्वस्त करता हुआ मानो युद्ध के लिए चुनौती देता हुआ आ रहा है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
घनपोत्रेति ॥ धनेन कठिनेन पोत्रेण मुखाग्रेण विदीर्णानि विदलितानि शालमूलानि वृक्षमूलानि येन सः । निबिडस्य स्कन्धस्य निकाषेण निकषणेन रुग्णवप्नो भग्नसानुः । अतो महासत्त्वसंपन्न इति भावः।एकश्चासौ चरश्चेत्येकचर एकाकी। यूथादपेत इत्यर्थः। अतोऽयं वराहः समराय समरं कर्तुम् ।
क्रियार्थोपपदस्य च कर्मणि स्थानिनः (अष्टाध्यायी २.३.१४ ) इति चतुर्थी । समाजुहूषमाण इव समाह्वातुमिच्छन्निव । इवशब्दः संभावनायाम् । समाह्वयतेः सन्नन्ताच्छानच्प्रत्ययः स्पर्धायामाङ्।पूर्ववत्सनः इत्यात्मनेपदम् । अभ्यस्तस्य च (अष्टाध्यायी ६.१.३३ ) इति संप्रसारणम्। मामभिवर्तते मामभिधावति।उपसर्गवशात्सकर्मकत्वम्। अतः सर्वथा नायमुपेक्ष्य इति भावः ॥
पदच्छेदः
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| घनपोत्रविदीर्णशालमूलः | घन–पोत्र–विदीर्ण–शाल–मूल (१.१) | he who has torn up the roots of Shala trees with his hard snout |
| निबिडस्कन्धनिकाषरुग्णवप्रः | निबिड–स्कन्ध–निकाष–रुग्ण–वप्र (१.१) | he who has broken river banks by rubbing his dense shoulders |
| अयम् | इदम् (१.१) | This |
| एकचरः | एकचर (१.१) | solitary wanderer |
| अभिवर्तते | अभिवर्तते (अभि√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | approaches |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| समराय | समर (४.१) | for battle |
| इव | इव | as if |
| समाजुहूषमाणः | समाजुहूषमाण (सम्+आ√ह्वे+सन्+शानच्, १.१) | desiring to challenge |
छन्दः
औपच्छन्दसिक
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| घ | न | पो | त्र | वि | दी | र्ण | शा | ल | मू | लो | |
| नि | बि | ड | स्क | न्ध | नि | का | ष | रु | ग्ण | व | प्रः |
| अ | य | मे | क | च | रो | ऽभि | व | र्त | ते | मां | |
| स | म | रा | ये | व | स | मा | जु | हू | ष | मा | णः |
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