विचकर्ष च संहितेषुरुच्चै-
श्चरणास्कन्दननामिताचलेन्द्रः ।
धनुरायतभोगवासुकिज्या-
वदनग्रन्थिविमुक्तवह्नि शम्भुः ॥
विचकर्ष च संहितेषुरुच्चै-
श्चरणास्कन्दननामिताचलेन्द्रः ।
धनुरायतभोगवासुकिज्या-
वदनग्रन्थिविमुक्तवह्नि शम्भुः ॥
श्चरणास्कन्दननामिताचलेन्द्रः ।
धनुरायतभोगवासुकिज्या-
वदनग्रन्थिविमुक्तवह्नि शम्भुः ॥
अन्वयः
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च चरण-आस्कन्दन-नामित-अचलेन्द्रः संहित-इषुः शम्भुः आयत-भोग-वासुकि-ज्या-वदन-ग्रन्थि-विमुक्त-वह्नि धनुः उच्चैः विचकर्ष।
English Summary
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And Shambhu (Shiva), who had fitted an arrow and bent the king of mountains with the stamping of his feet, forcefully drew his bow, from the knot of whose bowstring—the mouth of the long-bodied Vasuki—fire was being released.
सारांश
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भगवान शिव ने भी अपना धनुष खींचा, जिसके दबाव से पर्वत झुक गया और वासुकि रूपी प्रत्यंचा के मुख से अग्नि प्रज्वलित हो उठी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
विचकर्षेति ॥ अथ शंभुश्च संहितेषुः सन् । उच्चैर्भृशं चरणास्कन्दनेन पदविष्टम्भेन नामितोऽधो नीतोऽचलेन्द्रो येन स तथोक्तः आयतभोग आकृष्टकायो वासुकिरेव ज्या तस्य वदनमेव ग्रन्थिस्तेन विमुक्त उत्सृष्टो वह्निर्यस्य तद्धनुर्विचकर्षेति स्वभावोक्तिः ॥
पदच्छेदः
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| विचकर्ष | विचकर्ष (वि√कृष् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | drew |
| च | च | And |
| संहित-इषुः | संहित–इषु (१.१) | he who had fitted an arrow |
| उच्चैः | उच्चैस् | forcefully |
| चरण-आस्कन्दन-नामित-अचलेन्द्रः | चरण–आस्कन्दन–नामित–अचलेन्द्र (१.१) | he who had bent the king of mountains with the stamping of his feet |
| धनुः | धनुस् (२.१) | the bow |
| आयत-भोग-वासुकि-ज्या-वदन-ग्रन्थि-विमुक्त-वह्नि | आयत–भोग–वासुकि–ज्या–वदन–ग्रन्थि–विमुक्त–वह्नि (२.१) | from the knot of whose bowstring—the mouth of the long-bodied Vasuki—fire was being released |
| शम्भुः | शम्भु (१.१) | Shambhu (Shiva) |
छन्दः
औपच्छन्दसिक
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | च | क | र्ष | च | सं | हि | ते | षु | रु | च्चै | |
| श्च | र | णा | स्क | न्द | न | ना | मि | ता | च | ले | न्द्रः |
| ध | नु | रा | य | त | भो | ग | वा | सु | कि | ज्या | |
| व | द | न | ग्र | न्थि | वि | मु | क्त | व | ह्नि | श | म्भुः |
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