अन्वयः
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यदि वा खाण्डवजातवेदसा प्रसभम् अवलीढसनाभिः अश्वसेनः समन्युः (सन्) प्रतिकर्तुम् उपागतः? वा वृकोदरेण कृतमन्युः (कश्चित् उपागतः)?
English Summary
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'Or has Ashvasena, whose kinsmen were forcefully consumed by the Khandava forest fire, come here full of wrath to retaliate? Or is it someone who has been angered by Vrikodara (Bhima)?'
सारांश
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क्या यह खाण्डव वन के दहन से क्रोधित अश्वसेन नाग है या भीम द्वारा अपमानित कोई शत्रु जो प्रतिशोध लेने आया है?
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अवलीढेति ॥ खाण्डवजातवेदसा खाण्डववनाग्निना प्रसभमवलीढसनाभिर्दग्धबन्धुः।
सपिण्डास्तु सनाभयः। सगोत्रबान्धवज्ञातिबन्धुस्वस्वजनाः समाः इत्यमरः (अमरकोशः २.६.३३ ) ।अत एव समन्युर्बद्धवैरः । तस्यार्जुनस्यापकारयितृत्वादिति भावः । अश्वसेनस्तक्षकपुषः कश्चिन्महासर्पः प्रतिकर्तुं वैरनिर्यातनार्थमुपागतो वा । वराहमाययेति शेषः । पक्षान्तरमाहयदि वा वृकोदरेण भीमसेनेन कृतमन्युर्जनितक्रोधो वा । कश्चिदिति शेषः । पुरा किल पाण्डवः खाण्डवदाहे पावकभयात्पलायमानांस्तक्षकपुत्रानश्वसेनस्य बन्धून्वाणैरवरुध्य दाहयामासेति भारतकथा ॥ अथ द्वाभ्यामनन्तरकरणीयमध्यवस्यति—बलेत्यादिना ॥
पदच्छेदः
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| अवलीढसनाभिः | अवलीढ–सनाभि (१.१) | he whose kinsmen were consumed |
| अश्वसेनः | अश्वसेन (१.१) | Ashvasena |
| प्रसभम् | प्रसभम् | forcefully |
| खाण्डवजातवेदसा | खाण्डव–जातवेदस् (३.१) | by the fire of the Khandava forest |
| वा | वा | or |
| प्रतिकर्तुम् | प्रतिकर्तुम् (प्रति√कृ+तुमुन्) | to retaliate |
| उपागतः | उपागत (उप+आ√गम्+क्त, १.१) | has come |
| समन्युः | समन्यु (१.१) | full of wrath |
| कृतमन्युः | कृत–मन्यु (१.१) | one who has been angered |
| यदि | यदि | if |
| वृकोदरेण | वृकोदर (३.१) | by Vrikodara (Bhima) |
छन्दः
औपच्छन्दसिक
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | व | ली | ढ | स | ना | भि | र | श्व | से | नः | |
| प्र | स | भं | खा | ण्ड | व | जा | त | वे | द | सा | वा |
| प्र | ति | क | र्तु | मु | पा | ग | तः | स | म | न्युः | |
| कृ | त | म | न्यु | र्य | दि | वा | वृ | को | द | रे | ण |
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