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वपुषां परमेण भूधराणा-
मथ सम्भाव्यपराक्रमं विभेदे ।
मृगमाशु विलोकयांचकार
स्थिरदंष्ट्रोग्रमुखं महेन्द्रसूनुः ॥

अन्वयः AI अथ महेन्द्रसूनुः परमेण वपुषाम् भूधराणाम् विभेदे सम्भाव्यपराक्रमम् स्थिरदंष्ट्रोग्रमुखम् मृगम् आशु विलोकयांचकार।
English Summary AI Then Arjuna, son of Mahendra, quickly saw a boar whose face was fierce with firm tusks and whose prowess was to be esteemed in splitting even the greatest of mountains.
सारांश AI अर्जुन ने पर्वतों के समान विशाल शरीर वाले, पराक्रमी, तीक्ष्ण दाढ़ों और भयानक मुख वाले एक वराह (जंगली सूअर) को शीघ्रता से देखा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) वपुषेति ॥ अथेश्वरप्रस्थानानन्तरं महेन्द्रसूनुरर्जुन: परमेण महता वपुषा हेतुना भूधराणां विमेदे विदारणे संभाव्यपराक्रमं क्षमोऽयमिति प्रतर्क्यपौरुषं स्थिराभ्यां दृढाभ्यां दंष्ट्राभ्यामुग्रं मुर्ख यस्य तं मृगम् । वराहमित्यर्थः । आशु तदागमनानन्तरम् । अविलम्वेनेत्यर्थः । विलोकयांचकार ददर्श । अस्मिन्सर्गे प्राक्पञ्चत्रिम्शच्छोकादौपच्छन्दसिकं वृत्तम् ॥
पदच्छेदः AI
वपुषाम्वपुस् (६.३) of bodies
परमेणपरम (३.१) by the supreme
भूधराणाम्भूधर (६.३) of mountains
अथअथ Then
सम्भाव्यपराक्रमम्सम्भाव्यपराक्रम (२.१) whose prowess was to be esteemed
विभेदेविभेद (७.१) in splitting
मृगम्मृग (२.१) a boar
आशुआशु quickly
विलोकयांचकारविलोकयांचकार (वि√लोक् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) saw
स्थिरदंष्ट्रोग्रमुखम्स्थिरदंष्ट्रउग्रमुख (२.१) whose face was fierce with firm tusks
महेन्द्रसूनुःमहेन्द्रसूनु (१.१) the son of Mahendra (Arjuna)
छन्दः औपच्छन्दसिक
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
पु षां मे भू रा णा
म्भा व्य रा क्र मं वि भे दे
मृ मा शु वि लो यां का
स्थि दं ष्ट्रो ग्र मु खं हे न्द्र सू नुः
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