कच्छान्ते सुरसरितो निधाय सेना-
मन्वतिः सकतिपयैः किरातवर्यैः ।
प्रच्छन्नस्तरुगहनैः सगुल्मजालै-
र्लक्ष्मीवाननुपदमस्य सम्प्रतस्थे ॥
कच्छान्ते सुरसरितो निधाय सेना-
मन्वतिः सकतिपयैः किरातवर्यैः ।
प्रच्छन्नस्तरुगहनैः सगुल्मजालै-
र्लक्ष्मीवाननुपदमस्य सम्प्रतस्थे ॥
मन्वतिः सकतिपयैः किरातवर्यैः ।
प्रच्छन्नस्तरुगहनैः सगुल्मजालै-
र्लक्ष्मीवाननुपदमस्य सम्प्रतस्थे ॥
अन्वयः
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लक्ष्मीवान् (शिवः) सुरसरितः कच्छान्ते सेनाम् निधाय, सकतिपयैः किरातवर्यैः अन्वितः, सगुल्मजालैः तरुगहनैः प्रच्छन्नः (सन्) अस्य अनुपदम सम्प्रतस्थे।
English Summary
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The glorious one (Shiva), having stationed his army on the bank of the celestial river (Ganges), accompanied by a few excellent Kiratas and concealed by dense trees and thickets of bushes, set out following the tracks of the boar.
सारांश
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गंगा के तट पर सेना को रोककर, किरात रूपी शिव कुछ प्रमुख किरातों के साथ झाड़ियों और घने वृक्षों के पीछे छिपते हुए उस शूकर के पीछे चल दिए।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
कच्छान्त इति ॥ लक्ष्मीवान् ।
मादुपधायाश्च मतोर्वोऽयवादिभ्यः (अष्टाध्यायी ८.२.९ ) इति मतुपो मकारस्य वकारादेशः । स शिवः । सुरसरितो मन्दाकिन्याः कच्छान्तेऽनूपप्रान्ते । जलप्रायमनूपं स्यात्पुंसि कच्छस्तथाविधः इत्यमरः (अमरकोशः २.१.११ ) । सेनां निधाय । स्थापयित्वेत्यर्थः । कतिपयैः किरातवर्यैरन्वीतोऽनुगतः सन् । ई गतौ इति धातोरनुपूर्वात्कर्मणि क्तः । सगुल्मजालैर्लताप्रतानसहितैस्तरुगहनैः प्रच्छन्नश्छादितः । वा दान्तशान्त- (अष्टाध्यायी ७.२.२७ ) इत्यादिना निपातः। तस्य वराहस्य पदमन्वनुपदम् । पदानुसारेणेत्यर्थः । संप्रतस्थेप्रस्थितः। समवप्रविभ्यः स्थः (अष्टाध्यायी १.३.२२ ) इत्यात्मनेपदम् । प्रहर्षणीवृत्तम्
पदच्छेदः
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| कच्छान्ते | कच्छ–अन्त (७.१) | on the bank |
| सुरसरितः | सुरसरित् (६.१) | of the celestial river (Ganges) |
| निधाय | निधाय (नि√धा+ल्यप्) | having stationed |
| सेनाम् | सेना (२.१) | the army |
| अन्वितः | अन्वित (अनु√इ+क्त, १.१) | accompanied by |
| सकतिपयैः | सकतिपय (३.३) | with a few |
| किरातवर्यैः | किरात–वर्य (३.३) | excellent Kiratas |
| प्रच्छन्नः | प्रच्छन्न (प्र√छद्+क्त, १.१) | concealed |
| तरुगहनैः | तरु–गहन (३.३) | by dense trees |
| सगुल्मजालैः | सगुल्मजाल (३.३) | and thickets of bushes |
| लक्ष्मीवान् | लक्ष्मीवत् (१.१) | the glorious one (Shiva) |
| अनुपदम् | अनुपदम् | following the tracks |
| अस्य | इदम् (६.१) | of it (the boar) |
| सम्प्रतस्थे | सम्प्रतस्थे (सम्+प्र√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | set out |
छन्दः
प्रहर्षिणी [१३: मनजरग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | च्छा | न्ते | सु | र | स | रि | तो | नि | धा | य | से | ना |
| म | न्व | तिः | स | क | ति | प | यैः | कि | रा | त | व | र्यैः |
| प्र | च्छ | न्न | स्त | रु | ग | ह | नैः | स | गु | ल्म | जा | लै |
| र्ल | क्ष्मी | वा | न | नु | प | द | म | स्य | स | म्प्र | त | स्थे |
| म | न | ज | र | ग | ||||||||
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