अन्वयः
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विजयी सः अनुनिशीथम् ज्वलतः अनलात्, अम्भसाम् निधेः च अधिकरुचिः, धैर्यगुणम् अवजयन्, शैलतः समुन्नततरः ददृशे ।
English Summary
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Every night, that victorious one (Arjuna) was seen, more radiant than a blazing fire and the ocean, surpassing their quality of steadfastness, and appearing loftier than the mountain itself.
सारांश
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अग्नि और चंद्रमा से भी अधिक दीप्तिमान अर्जुन अपने धैर्य के कारण हिमालय पर्वत से भी ऊंचे और महान प्रतीत हो रहे थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
ज्वलत इति ॥ विजयी सोऽर्जुनोऽनुनिशीथमर्धरात्रे। विभत्स्यर्थेऽव्ययीभावः। अर्धरात्रनिशीथौ द्वौ' इत्यमरः । ज्वलतो दीप्यमानादनलादग्नेरधिकरुचिदीप्यमानस्तथाम्भसां निधेधैर्यं गाम्भीर्यं तदेव गुणस्तमवजयन् । किं च । शैलतः शैलादपि समुन्नततरो ददृशे दृष्टः अत्र रुच्यादिभिरनलाद्याधिक्यासंबन्धे संबन्धाभिधानादतिशयोक्तिरलंकारः॥
पदच्छेदः
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| ज्वलतः | ज्वलत् (√ज्वल्+शतृ, ५.१) | from the blazing |
| अनलात् | अनल (५.१) | fire |
| अनुनिशीथम् | अनुनिशीथम् | every night |
| अधिकरुचिः | अधिक–रुचि (१.१) | more radiant |
| अम्भसाम् | अम्भस् (६.३) | of the waters |
| निधेः | निधि (५.१) | than the repository (ocean) |
| धैर्यगुणम् | धैर्य–गुण (२.१) | the quality of steadfastness |
| अवजयन् | अवजयत् (अव√जि+शतृ, १.१) | surpassing |
| विजयी | विजयिन् (१.१) | the victorious one |
| ददृशे | ददृशे (√दृश् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| समुन्नततरः | समुन्नत (सम्+उद्√नम्+क्त)–तर (१.१) | loftier |
| सः | तद् (१.१) | he |
| शैलतः | शैल (+तसिल्) | than the mountain |
छन्दः
उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज्व | ल | तो | ऽन | ला | द | नु | नि | शी | थ | |||
| म | धि | क | रु | चि | र | म्भ | सां | नि | धेः | |||
| धै | र्य | गु | ण | म | व | ज | य | न्वि | ज | यी | ||
| द | दृ | शे | स | मु | न्न | त | त | रः | स | शै | ल | तः |
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