मथिताम्भसो रयविकीर्ण-
मृदितकदलीगवेधुकाः ।
क्लान्तजलरुहलताः सरसी-
र्विदधे निदाघ इव सत्त्वसम्प्लवः ॥

अन्वयः AI सत्त्वसम्प्लवः निदाघः इव, मथितअम्भसः, रयविकीर्णमृदितकदलीगवेधुकाः, क्लान्तजलरुहलताः सरसीः विदधे।
English Summary AI The great stampede of animals, like the summer heat, made the lakes have their waters churned, their plantain and gavedhuka plants scattered and crushed by the rush, and their lotus-creepers withered.
सारांश AI सैनिकों की भीड़ ने तालाबों के जल को मथ दिया और किनारों की लताओं एवं वनस्पतियों को रौंद दिया, जिससे वे ग्रीष्म ऋतु की भांति झुलसी हुई प्रतीत होने लगीं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) मथिताम्भस इति ॥ सत्त्वसंप्लव प्राणिसंक्षोभो निदाघो ग्रीष्म एक सरसीः सरांसि। कासारः सरसी सरः इत्यमरः (अमरकोशः १.१०.२८ ) । मथिताम्भसः संक्षोभितोदका रयेण पलायनवेगेन विकीर्णं व्याकीर्णं यथा तथा मृदिता निष्पीडिताः कदल्यो गवेधुकास्तृणधान्यविशेषाश्च यासां तास्तथोक्ताः। तृणधान्यानि नीवाराः स्त्री गवेधुर्गवेधुका इत्यमरः (अमरकोशः २.९.२५ ) । मृदित इति क्विति च इति गुणप्रतिषेधः । क्लान्ता जलरुहलता पद्मिन्यो यासु ता एवंभूता विदधे चकार॥
पदच्छेदः AI
मथितअम्भसःमथितअम्भस् (२.३) with churned waters
रयविकीर्णमृदितकदलीगवेधुकाःरयविकीर्णमृदितकदलीगवेधुका (२.३) with plantain and gavedhuka plants scattered and crushed by the rush
क्लान्तजलरुहलताःक्लान्तजलरुहलता (२.३) with withered lotus-creepers
सरसीःसरसी (२.३) the lakes
विदधेविदधे (वि√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) made
निदाघःनिदाघ (१.१) the summer heat
इवइव like
सत्त्वसम्प्लवःसत्त्वसम्प्लव (१.१) the stampede of animals
छन्दः उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३
थि ता म्भ सो वि की र्ण
मृ दि ली वे धु काः
क्ला न्त रु ताः सी
र्वि धे नि दा त्त्व म्प्ल वः
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