अन्वयः
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हरसैनिकाः प्रतिभये अपि, गजमदसुगन्धिकेसरैः, प्रतिबोधजृम्भमुखैः मृगाधिपैः सहसा स्वस्थम् अभिददृशिरे।
English Summary
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Despite the great terror, Shiva's soldiers were suddenly calmly looked upon by the lions, whose manes were fragrant with the ichor of elephants and whose faces were yawning upon being awakened.
सारांश
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शिव के सैनिकों ने हाथियों के मद की सुगंध वाले केसर युक्त सिंहों को देखा, जो नींद से जागकर जम्हाई ले रहे थे और भय के क्षणों में भी शांत थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
हरेति॥ प्रतिभये भयहेतौ।
भयंकरं प्रतिभयम् इत्यमरः प्राप्तेऽपीति शेषः। गजमदैः सुगन्धयः सुरभयः केसराः सटा येषां तैः। हतानेकगजैरित्यर्थः । सहसा सेनाकलकलश्रवणानन्तरमेव प्रतिबोधेन निद्रापगमेन जृम्भितानि व्यात्तानि मुखानि येषां तैर्मृगाधिपैः सिंहैः स्वस्थं निःशङ्कमेव यथा तथा हरसैनिका अभिददृशिर ईक्षिताः। न तु किंचित्क्षुभितमित्यर्थः । युक्तं चैतद्राजनामधारिणां केसरिणामिति भावः॥
पदच्छेदः
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| हरसैनिकाः | हर–सैनिक (१.३) | Shiva's soldiers |
| प्रतिभये | प्रतिभय (७.१) | in great terror |
| अपि | अपि | even |
| गजमदसुगन्धिकेसरैः | गजमद–सुगन्धि–केसर (३.३) | with manes fragrant with elephant ichor |
| स्वस्थम् | स्वस्थ (२.१) | calmly |
| अभिददृशिरे | अभिददृशिरे (अभि√दृश् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | were looked upon |
| सहसा | सहसा | suddenly |
| प्रतिबोधजृम्भमुखैः | प्रतिबोध–जृम्भ–मुख (३.३) | with faces yawning upon awakening |
| मृगाधिपैः | मृग–अधिप (३.३) | by the lions |
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