अन्वयः
AI
च अस्य अनुकूलम् विचिन्त्य, आत्तविग्रहैः शूलपरशुशरचापभृतैः गणपतिभिः महती वनेचरचमूः विनिर्ममे।
English Summary
AI
And, considering his (Shiva's) purpose, a great army of forest-dwellers was created by the Ganas, who had assumed physical forms and were carrying pikes, axes, arrows, and bows.
सारांश
AI
शिव की इच्छा जानकर विभिन्न शरीर धारण किए हुए गणपतियों ने शूल, फरसा, बाण और धनुष लेकर भीलों की एक विशाल सेना तैयार कर ली।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अनकूलमिति ॥ अस्य शिवस्यानुकूलं विचिन्त्य प्रियमिति निश्चित्यात्तविग्रहैहीतकिरातदेहै:। तथा शूलानि परशवः कुठाराः शराश्चापानि च तानि भृतानि यैस्तैः ।
प्रहरणार्थेभ्यः परे निष्ठासप्तम्यौ इति निष्ठायाः परनिपातः । गणपतिभिः प्रमथमुख्यैर्महती वनेचरचमूः सेना विनिर्ममे निर्मिता । माङ: कर्मणि लिट् ॥
पदच्छेदः
AI
| अनुकूलम् | अनुकूल (२.१) | favorably |
| अस्य | इदम् (६.१) | his (Shiva's) |
| च | च | and |
| विचिन्त्य | विचिन्त्य (वि√चिन्त्+ल्यप्) | having considered |
| गणपतिभिः | गणपति (३.३) | by the Ganas |
| आत्तविग्रहैः | आत्त–विग्रह (३.३) | who had assumed physical forms |
| शूलपरशुशरचापभृतैः | शूल–परशु–शर–चाप–भृत् (३.३) | carrying pikes, axes, arrows, and bows |
| महती | महत् (१.१) | a great |
| वनेचरचमूः | वनेचर–चमू (१.१) | army of forest-dwellers |
| विनिर्ममे | विनिर्ममे (वि+निर्√मा भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was created |
छन्दः
उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | नु | कू | ल | म | स्य | च | वि | चि | न्त्य | |||
| ग | ण | प | ति | भि | रा | त्त | वि | ग्र | हैः | |||
| शू | ल | प | र | शु | श | र | चा | प | भृ | तै | ||
| र्म | ह | ती | व | ने | च | र | च | मू | र्वि | नि | र्म | मे |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.