अन्वयः
AI
मूकदानवः एतत् निपुणम् सुरकृत्यम् इति अवगम्य, पाण्डुसुतम् हन्तुम् त्वरया अभिपतति। तत् अत्र मया सह गम्यताम्।
English Summary
AI
"The demon Muka, having skillfully understood that this is the work of the gods, is rushing with haste to kill the son of Pandu. Therefore, let us go there together."
सारांश
AI
देवताओं के इस कार्य को जानकर मूक नामक दानव अर्जुन को मारने के लिए तेजी से आ रहा है, इसलिए तुम सब मेरे साथ चलो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
सुरेति॥ मूकदानवो मूकाख्यः कश्चिदसुर एतत्पाण्डवकृत्यं सुरकृत्यमिति निपुणमवगम्य साधु निश्चित्य पाण्डुसुतमर्जुनं हन्तुमभिपतति । तत्तस्मात्कारणादत्रार्जुनाश्रमे विषये । आश्रमं प्रतीत्यर्थः । मया सह त्वरया गम्यताम् । द्रष्टुमिति शेषः ॥
पदच्छेदः
AI
| सुरकृत्यम् | सुर–कृत्य (२.१) | the work of the gods |
| एतत् | एतद् (२.१) | this |
| अवगम्य | अवगम्य (अव√गम्+ल्यप्) | having understood |
| निपुणम् | निपुण (२.१) | skillfully |
| इति | इति | that |
| मूकदानवः | मूक–दानव (१.१) | the demon Muka |
| हन्तुम् | हन्तुम् (√हन्+तुमुन्) | to kill |
| अभिपतति | अभिपतति (अभि√पत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is rushing |
| पाण्डुसुतम् | पाण्डु–सुत (२.१) | the son of Pandu |
| त्वरया | त्वरा (३.१) | with haste |
| तत् | तत् | therefore |
| अत्र | अत्र | there |
| सह | सह | with |
| गम्यताम् | गम्यताम् (√गम् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be gone |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
छन्दः
उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | र | कृ | त्य | मे | त | द | व | ग | म्य | |||
| नि | पु | ण | मि | ति | मू | क | दा | न | वः | |||
| ह | न्तु | म | भि | प | त | ति | पा | ण्डु | सु | तं | ||
| त्व | र | या | त | द | त्र | स | ह | ग | म्य | तां | म | या |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.