अन्वयः
AI
विभू अयम् अच्युतः च सरसिरुहजन्मनः वचनेन असुरनिधनेन प्रजाः पातुम् भुवम् अभ्युपेत्य मनुजेषु तिष्ठतः।
English Summary
AI
"And these two, the all-pervading Arjuna and Achyuta (Krishna), at the behest of the lotus-born Brahma, have descended to the earth and dwell among mortals to protect the people by destroying the demons."
सारांश
AI
ब्रह्मा की आज्ञा से यह और अच्युत असुरों का विनाश कर प्रजा की रक्षा हेतु मनुष्यों के बीच अवतार लेकर स्थित हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अयमिति ॥ विभू प्रभू अयं नरोऽच्युतः कृष्णश्च सरसिरुहजन्मनो ब्रह्मणो वचनेन प्रार्थनयासुराणां निधनेन मारणेन करणेन प्रजाः पातुं रक्षितुं भुवमभ्युपेत्य मनुजेषु तिष्ठतः । वस्तुतस्तु साक्षान्नरनारायणावेतौ कृष्णार्जुनावित्यर्थः ॥ अथास्य सत्त्वसंपदं प्रकाशयितुमाहसु रकृत्यमेतदवगम्य निपुणमिति मूकदानवः। हन्तुमभिपतति पाण्डुसुतं त्वरया तदत्र सह गम्यतां मया
पदच्छेदः
AI
| अयम् | इदम् (१.१) | this one (Arjuna) |
| अच्युतः | अच्युत (१.१) | Achyuta (Krishna) |
| च | च | and |
| वचनेन | वचन (३.१) | by the word |
| सरसिरुहजन्मनः | सरसिरुहजन्मन् (६.१) | of the lotus-born (Brahma) |
| प्रजाः | प्रजा (२.३) | the people |
| पातुम् | पातुम् (√पा+तुमुन्) | to protect |
| असुरनिधनेन | असुर–निधन (३.१) | by the destruction of demons |
| विभू | विभु (१.२) | the all-pervading ones |
| भुवम् | भू (२.१) | the earth |
| अभ्युपेत्य | अभ्युपेत्य (अभि+उप√इ+ल्यप्) | having descended to |
| मनुजेषु | मनुज (७.३) | among mortals |
| तिष्ठतः | तिष्ठतः (√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | they dwell |
छन्दः
उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | य | म | च्यु | त | श्च | व | च | ने | न | |||
| स | र | सि | रु | ह | ज | न्म | नः | प्र | जाः | |||
| पा | तु | म | सु | र | नि | ध | ने | न | वि | भू | ||
| भु | व | म | भ्यु | पे | त्य | म | नु | जे | षु | ति | ष्ठ | तः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.