अन्वयः
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नाथ, किम् उपेक्षसे? कथय। तव किञ्चन न विदितम् न। (त्वम्) नः त्रातुम् अलम्। (त्वम्) अभयदः अर्हसि। त्वयि शासति (सति) पराभवः मा स्म भवत्।
English Summary
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"O Lord, why do you remain indifferent? Speak! Nothing is unknown to you. You are capable of protecting us. You ought to grant us fearlessness. While you are ruling, let there be no defeat for us."
सारांश
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हे नाथ, आप उपेक्षा क्यों कर रहे हैं? आपसे कुछ भी छिपा नहीं है। आप हमें अभय दान देने में समर्थ हैं; आपके शासन में हमारा पराभव नहीं होना चाहिए।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
किमिति ॥ हे नाथ, किं किमर्थमुपेक्षसे कथय । त्वमिति शेषः। तव न विदितम् । त्वयाज्ञायमानमित्यर्थः।
क्तस्य च वर्तमाने (अष्टाध्यायी २.३.६७ ) इति षष्ठी।न किंचन किमपि न । हे अभयद, नोऽस्मानलं त्रातुमर्हसि । त्वयि शासति सति पराभवो मा स्म भवन्माभूत्। स्मोत्तरे लङ् च (अष्टाध्यायी ३.३.१७६ ) इति लङ् ॥
पदच्छेदः
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| किम् | किम् | why |
| उपेक्षसे | उपेक्षसे (उप√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | do you ignore |
| कथय | कथय (√कथ् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | tell |
| नाथ | नाथ (८.१) | O Lord |
| न | न | not |
| तव | युष्मद् (६.१) | by you |
| विदितम् | विदित (√विद्+क्त, १.१) | known |
| न | न | not |
| किंचन | किंचन | anything |
| त्रातुम् | त्रातुम् (√त्रै+तुमुन्) | to protect |
| अलम् | अलम् | are able |
| अभयदः | अभय–द (१.१) | giver of fearlessness |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you ought |
| नः | अस्मद् (२.३) | us |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | while you |
| मा | मा | let not |
| स्म | स्म | (past particle) |
| शासति | शासत् (√शास्+शतृ, ७.१) | are ruling |
| भवत् | भवत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | be |
| पराभवः | पराभव (१.१) | defeat |
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