अन्वयः
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(हे) भुवनैकपुरुष, भीमविग्रहः कः अपि पुरुषः, वृत्रः इव, अमलवपुषः रवेः अपि ज्योतिः अभिभूय, तरसा एव तपस्यति ।
English Summary
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"O sole being of the universe! Some person of formidable appearance, like Vritra, is performing penance with great force, overpowering even the light of the sun, which itself has a pure body."
सारांश
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मुनियों ने कहा—हे प्रभु, कोई अद्भुत शक्तिशाली पुरुष इस समय तप कर रहा है, जिसकी कांति सूर्य के तेज को भी मात दे रही है और वह वृत्रासुर के समान भयंकर है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तरसेति॥ हे भुवनैकपुरुष,वृत्रो वृत्रासुर इव भीमविग्रहः कोऽपि। अविज्ञात इत्यर्थः। पुरुषस्तरसा बलात्कारेणैव ।
तरसी बलरंहसी इति विश्वः । अमलवपुष उज्वलमूर्ते रवेरपि ज्योतिरभिभूय तपस्यति तपश्चरति । कर्मणो रोमन्थतपोभ्यां वर्तिचरो: इति क्यङ् ॥
पदच्छेदः
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| तरसा | तरस् (३.१) | with force |
| एव | एव | indeed |
| कः | किम् (१.१) | some |
| अपि | अपि | (indefinite particle) |
| भुवनैकपुरुष | भुवन–एक–पुरुष (८.१) | O sole being of the universe |
| पुरुषः | पुरुष (१.१) | person |
| तपस्यति | तपस्यति (√तपस् +क्यच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is performing penance |
| ज्योतिः | ज्योतिस् (२.१) | the light |
| अमलवपुषः | अमल–वपुस् (६.१) | of the one with a pure body |
| अपि | अपि | even |
| रवेः | रवि (६.१) | of the sun |
| अभिभूय | अभिभूय (अभि√भू+ल्यप्) | having overpowered |
| वृत्रः | वृत्र (१.१) | Vritra |
| इव | इव | like |
| भीमविग्रहः | भीम–विग्रह (१.१) | of formidable appearance |
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