अन्वयः
AI
ततः नयनविनिमेषनोदिताः मुनयः अभिमुखम् एत्य, पाण्डुतनयतपसा जनितम् जगताम् अशर्म भृशम् आचचक्षिरे ।
English Summary
AI
Then the sages, prompted by a blink of his eyes, approached him and reported in detail the great distress caused to the worlds by the penance of Pandu's son (Arjuna).
सारांश
AI
तदुपरांत, शिव के समक्ष उपस्थित होकर मुनियों ने अर्जुन की तपस्या से उत्पन्न हुए संसार के भारी संताप के विषय में उन्हें सूचित किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
मुनय इति ॥ ततो दर्शनानन्तरं मुनयोऽभिमुखमेत्य । शिवस्येति शेषः । नयनविनिमेषेण नेत्रसंज्ञया नोदिताः प्रेरिताः सन्तः पाण्डुतनयस्यार्जुनस्य तपसा जनितं तत्पूर्वोक्तं जगतामशर्मासुखम् । दुःखमित्यर्थः ।
शर्मशातसुखानि च इत्यमरः (अमरकोशः १.४.२६ ) । भृशं सम्यगाचचक्षिरे कथितवन्तः॥
पदच्छेदः
AI
| मुनयः | मुनि (१.३) | the sages |
| ततः | ततस् | then |
| अभिमुखम् | अभिमुखम् | approaching |
| एत्य | एत्य (आ√इ+ल्यप्) | having come |
| नयनविनिमेषनोदिताः | नयन–विनिमेष–नोदित (√नुद्+क्त, १.३) | prompted by the blinking of his eyes |
| पाण्डुतनयतपसा | पाण्डुतनय–तपस् (३.१) | by the penance of Pandu's son |
| जनितम् | जनित (√जन्+णिच्+क्त, २.१) | caused |
| जगताम् | जगत् (६.३) | of the worlds |
| अशर्म | अशर्मन् (२.१) | distress |
| भृशम् | भृशम् | greatly |
| आचचक्षिरे | आचचक्षिरे (आ√चक्ष् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | reported |
छन्दः
उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | न | य | स्त | तो | ऽभि | मु | ख | मे | त्य | |||
| न | य | न | वि | नि | मे | ष | नो | दि | ताः | |||
| पा | ण्डु | त | न | य | त | प | सा | ज | नि | तं | ||
| ज | ग | ता | म | श | र्म | भृ | श | मा | च | च | क्षि | रे |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.