अन्वयः
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अथो अशरणाः महर्षयः, गुणाः विनयम् इव, नयाः अपनयभिदम् विवेकम् इव, अवधयः न्यायम् इव, शिवम् शरणम् ययुः ।
English Summary
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Then, the great sages, feeling helpless, sought refuge in Shiva, just as virtues seek humility, as policies seek discrimination that destroys wrong conduct, and as rules seek justice.
सारांश
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जैसे सद्गुण विवेक का आश्रय लेते हैं, वैसे ही भयभीत महर्षि रक्षा के लिए भगवान शिव की शरण में पहुँचे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
विनयमिति ॥ अथोऽनन्तरमशरणा महर्षयो मुनयो विनयं शिक्षां गुणा औदार्यादय इव।अशिक्षितस्य तदभावादिति भावः। अपनयभिदं दुर्नीतिवारकं विवेकं सदसज्ज्ञानं नया नीतय इत । अविवेकिनो नीत्यभावादिति भावः । नीतिः षाङ्गुण्यप्रयोगः। नीयतेऽनेनेति न्यायो नियामकं प्रमाणं तम् । अवधयः समया इव । अप्रामाणिकस्य समयोल्लङ्घनादिति भावः। शिवं शरणं रक्षितारम् ।
शरणं गृहरक्षित्रोः इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.५९ ) । ययुर्जग्मुः।शरणत्वेन प्रापुरित्यर्थः । अशरणाः शरणमिति चोपमास्वपि यथायोग्यं योज्यम् । उपमालंकारः॥
पदच्छेदः
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| विनयम् | विनय (२.१) | humility |
| गुणाः | गुण (१.३) | virtues |
| इव | इव | like |
| विवेकम् | विवेक (२.१) | discrimination |
| अपनयभिदम् | अपनयभिद् (२.१) | that which destroys wrong conduct |
| नयाः | नय (१.३) | policies |
| इव | इव | like |
| न्यायम् | न्याय (२.१) | justice |
| अवधयः | अवधि (१.३) | rules |
| इव | इव | like |
| अशरणाः | अशरण (१.३) | helpless |
| शरणम् | शरण (२.१) | refuge |
| ययुः | ययुः (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | sought |
| शिवम् | शिव (२.१) | in Shiva |
| अथो | अथो | then |
| महर्षयः | महर्षि (१.३) | the great sages |
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