सारांश
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वे मनस्वी पुरुष धन्य हैं जो सूखे वृक्ष पर गिरती बिजली के समान शत्रुओं पर अपना भीषण क्रोध बरसाते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
उदाहरणमिति ॥ यैरमर्षः क्रोध: शुष्के नीरसेऽशनिरिवारातिषु विषये पात्यते प्रक्षिप्यते मनस्विनां मानिनां प्रथमेऽग्रेसरास्त आशी:षु पुरुषैरेवं भवितव्यमेवंरूपासूदाहरणं निदर्शनम् । भवन्तीति शेषः । रामादिवदुपमानं भवन्तीत्यर्थः । अतो न त्याज्यो मान इति संदर्भार्थः॥ यदुक्तम्
अभिद्रोहेण भूतानाम् इत्यादि, तत्र युग्मेनोत्तरमाह
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | दा | ह | र | ण | मा | शीः | षु |
| प्र | थ | मे | ते | म | न | स्वि | नाम् |
| शु | ष्के | ऽश | नि | रि | वा | म | र्षो |
| यै | र | रा | ति | षु | पा | त्य | ते |
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