सारांश
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उस पुरुष का जन्म सार्थक है जिसका नाम श्रेष्ठों की गणना में प्रथम आता है और उसके बाद दूसरी उंगली किसी अन्य पर नहीं उठती।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
स इति ॥ स पुमानर्थवज्जन्मा सार्थकजन्मा यस्य पुंसो नाम्नि पुरोऽग्रे स्थिते सति संख्यायां पुरुषगणनाप्रस्ताव उद्यता गुणमधिकृत्योन्नमिताङ्गुलिरन्यां द्वितीयामङ्गुलिम् ॥ उद्यतामिति शेषः । नाभ्येति न प्राप्नोति । अद्वितीयत्वादस्येत्यर्थः। एतन्मानरहितस्य न संभवतीति भावः॥
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | पु | मा | न | र्थ | व | ज्ज | न्मा |
| य | स्य | ना | म्नि | पु | रः | स्थि | ते |
| ना | न्या | म | ङ्गु | लि | म | भ्ये | ति |
| सं | ख्या | या | मु | द्य | ता | ङ्गु | लिः |
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