अन्वयः
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राजन्, वपुषा गूढः अपि, तनु-अभ्र-पटल-छन्न-विग्रहः अंशुमान् इव, लोक-अभिभाविना धाम्ना (सः आसीत्) ।
English Summary
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Though concealed by his (ascetic's) body, he was resplendent with a world-overpowering lustre, like the sun whose form is veiled by a thin layer of clouds.
सारांश
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वेश बदलकर आने पर भी वे अपने दिव्य तेज से संसार को अभिभूत कर रहे थे, जैसे पतले बादलों की ओट में छिपा सूर्य हो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
गूढ इति ॥ वपुषा गूढोऽपि । प्रच्छन्नरूपोऽपीयर्थः । प्रकृत्यादिभ्य उपसंख्यानात्तृतीया । तन्वभ्रपटलच्छन्नविग्रहः स्तोकाभ्रवृन्दान्तरितमूर्तिरम्शुमानिव लोकाभिभाविना लोकव्यापिना धाम्ना तेजसा । राजन्दीप्यमानो दद्दश इति पूर्वेण संबन्धः ॥
पदच्छेदः
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| गूढः | गूढ (√गुह्+क्त, १.१) | concealed |
| अपि | अपि | although |
| वपुषा | वपुस् (३.१) | by his body |
| राजन् | राजत् (१.१) | shining |
| धाम्ना | धामन् (३.१) | with lustre |
| लोकाभिभाविना | लोकाभिभाविन् (३.१) | overpowering the world |
| अंशुमान् | अंशुमत् (१.१) | the sun |
| इव | इव | like |
| तन्वभ्रपटलच्छन्नविग्रहः | तनु–अभ्रपटल–छन्न–विग्रहः (१.१) | whose form is covered by a thin layer of clouds |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गू | ढो | ऽपि | व | पु | षा | रा | ज |
| न्धा | म्ना | लो | का | भि | भा | वि | ना |
| अं | शु | मा | नि | व | त | न्व | भ्र |
| प | ट | ल | च्छ | न्न | वि | ग्र | हः |
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