अन्वयः
AI
यदि अमर्षः प्रतीकारम् भुजालम्बम् न लम्भयेत्, (तर्हि) परैः परिभूतस्य मे हृदयम् सद्यः ध्वंसेत।
English Summary
AI
'My heart, having been so deeply insulted by my enemies, would shatter instantly if my own burning indignation did not make retaliation, supported by the strength of my arms, an attainable goal.'
सारांश
AI
शत्रुओं द्वारा अपमानित मेरा हृदय तत्काल फट गया होता, यदि मेरे क्रोध ने मुझे प्रतिशोध के रूप में भुजाओं का आलंबन न दिया होता।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
ध्वंसतेति ॥ परैः शत्रुभिः परिभूतस्य मे हृदयं सद्यो ध्वंसेत। भ्रश्येदित्यर्थः । अमर्षः कर्ता प्रतीकारं प्रतिक्रियारूपं भुजालम्बं हस्तावलम्बनं न लम्भयेन्न ग्राहयेद्यदि । हृदयेनेति शेषः । सत्यं जीवामि प्रतिविधित्सया । न तु निर्लज्जतयेति भावः ॥ ननु तवैव कोऽयमभिमानस्तत्राह
पदच्छेदः
AI
| ध्वंसेत | ध्वंसेत (√ध्वंस् कर्तरि विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | would shatter |
| हृदयम् | हृदय (१.१) | the heart |
| सद्यः | सद्यस् | instantly |
| परिभूतस्य | परिभूत (परि√भू+क्त, ६.१) | of one insulted |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| परैः | पर (३.३) | by enemies |
| यदि | यदि | if |
| अमर्षः | अमर्ष (१.१) | indignation |
| प्रतीकारम् | प्रतीकार (२.१) | retaliation |
| भुजालम्बम् | भुज–आलम्ब (२.१) | supported by my arms |
| न | न | not |
| लम्भयेत् | लम्भयेत् (√लभ् +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did make attainable |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध्वं | से | त | हृ | द | यं | स | द्यः |
| प | रि | भू | त | स्य | मे | प | रैः |
| य | द्य | म | र्षः | प्र | ती | का | रं |
| भु | जा | ल | म्बं | न | ल | म्भ | येत् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.