अन्वयः
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तोयराशीनाम् तोयानि मनस्विनाम् मनांसि च स्थित्यतिक्रान्तिभीरूणि (भवन्ति), (अतः) आकुलितानि अपि स्वच्छानि (भवन्ति)।
English Summary
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'The waters of the oceans and the minds of the high-minded are fearful of transgressing their proper bounds. Therefore, even when they are agitated, they remain fundamentally clear and pure.'
सारांश
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महापुरुषों के मन समुद्र के जल के समान होते हैं, जो अत्यंत व्याकुल होने पर भी अपनी मर्यादा का परित्याग नहीं करते और अपनी स्वच्छता बनाए रखते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
स्थितीति ॥ तोयराशीनां समुद्राणां तोयानि मनस्विना मनांसि च स्थित्यविक्रान्तेर्मर्यादोल्लङ्घनादेवोर्भीरुण्यतएवाकुलितानि संक्षोभितान्यपि स्वच्छान्यकलुषाणि। न त्वरन्त इत्यर्थः। मनस्व्ययं युधिष्ठिर इति भावः । अत्र तोयानां सामान्यतो मनस्विनां चापकृतानामेव गुणतौल्यादौपम्यस्य गम्यतया तुल्ययोगितालंकारः । गुणश्चात्र भीरुत्वं स्वच्छता च॥ नन्वजातशत्रोः स्वजनवैरे किं कारणमित्याशङ्क्यास्मत्सौहार्दमेवेत्याह
पदच्छेदः
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| स्थित्यतिक्रान्तिभीरूणि | स्थिति–अतिक्रान्ति–भीरु (१.३) | are fearful of transgressing their bounds |
| स्वच्छानि | स्वच्छ (१.३) | clear/pure |
| आकुलितानि | आकुलित (१.३) | agitated |
| अपि | अपि | even when |
| तोयानि | तोय (१.३) | the waters |
| तोयराशीनाम् | तोयराशि (६.३) | of the oceans |
| मनांसि | मनस् (१.३) | the minds |
| च | च | and |
| मनस्विनाम् | मनस्विन् (६.३) | of the high-minded |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्थि | त्य | ति | क्रा | न्ति | भी | रू | णि |
| स्व | च्छा | न्या | कु | लि | ता | न्य | पि |
| तो | या | नि | तो | य | रा | शी | नां |
| म | नां | सि | च | म | न | स्वि | नाम् |
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