अन्वयः
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अनुजसहायेन द्रौपद्या च मया विना तेन (राज्ञा) आयामि-यामासु यामिनीषु भृशम् अभितप्यते।
English Summary
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'Without his companions—his younger brothers, Draupadi, and me—he (Yudhishthira) is greatly tormented during the long watches of the night.'
सारांश
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मुझ अर्जुन, अनुजों और द्रौपदी के बिना, ज्येष्ठ भ्राता युधिष्ठिर विरह और संताप के कारण रात्रियों में अत्यंत कष्ट का अनुभव करते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तेनेति ॥अनुजाः सहाया यस्य तेन । अनुजयुक्तेनेत्यर्थः । तुल्ययोगः सहायार्थः ।, तेन युधिष्ठिरेण द्रौपद्या च भया विना । मद्विरह्यदित्यर्थः । आयामिनो दीर्घा यामा: प्रहरा यासां तास्ताम् । दुःखितस्य तथाभावादिति भावः। यामिनीष्वभितप्यते। भावे लट् । तेषु सद्वत्वेषां मय्यप्यासङ्गान्न वैराग्यावकाश इत्यर्थः ॥ अथ वैरिनिर्यातनस्यावश्यंभावद्योतनाय चतुर्भिः परनिकारान्वर्णयति
पदच्छेदः
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| तेन | तद् (३.१) | by him (Yudhishthira) |
| अनुजसहायेन | अनुज–सहाय (३.१) | with his younger brothers as companions |
| द्रौपद्या | द्रौपदी (३.१) | with Draupadi |
| च | च | and |
| मया | अस्मद् (३.१) | with me |
| विना | विना | without |
| भृशम् | भृशम् | greatly |
| आयामियामासु | आयामिन्–याम (७.३) | in the long watches |
| यामिनीषु | यामिनी (७.३) | of the nights |
| अभितप्यते | अभितप्यते (अभि√तप् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he is tormented |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | ना | नु | ज | स | हा | ये | न |
| द्रौ | प | द्या | च | म | या | वि | ना |
| भृ | श | मा | या | मि | या | मा | सु |
| या | मि | नी | ष्व | भि | त | प्य | ते |
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