अन्वयः
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तात, ते अस्य श्रेयसः वचसः अपि अहम् भाजनम् न अस्मि, स्फुटतारस्य नभसः रात्रेः विपर्ययः इव।
English Summary
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'O revered one, I am not a worthy recipient of this beneficial speech of yours, just as the day, the opposite of night, is not a recipient for a sky full of bright stars.'
सारांश
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हे तात! मैं आपके इन कल्याणकारी वचनों का उपयुक्त पात्र नहीं हूँ, जैसे तारों भरी रात का सौंदर्य दिन के आकाश के लिए संभव नहीं है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
श्रेयस इति॥ हे तात।
पुत्रे पितरि पूज्ये च तातशब्दं प्रचक्षते इति। श्रेयसोऽपि हितार्थयोगात्प्रशस्ततरस्याप्यस्य ते तव वचसो हितोपदेशरूपस्य रात्रेर्विपर्ययो दिवसः स्फुटतारस्य व्यक्ततारकस्य नभस इव भाजनं पात्रं नास्मि । अनधिकारित्वादिति भावः । अत्राह्नो नभोमात्रसंबन्धसंभवेऽपि तारासंबन्धासंभवात्तद्विशिष्टनभःसंबन्धविरोधाधुक्तं तारकितस्य नभसो न पात्रमहरिति । कुतस्ते मोक्षोपदेशानधिकारित्वम्, किं च ते तपसः पौर्वापर्यमित्यपेक्षायां तत्सर्वं स्वजात्यादिकथनपूर्वकं निरूपयति
पदच्छेदः
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| श्रेयसः | श्रेयस् (६.१) | of the beneficial |
| अपि | अपि | even |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| तात | तात (८.१) | O revered one |
| वचसः | वचस् (६.१) | speech |
| न | न | not |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| भाजनम् | भाजन (१.१) | a worthy recipient |
| नभसः | नभस् (६.१) | for the sky |
| स्फुटतारस्य | स्फुट–तार (६.१) | full of bright stars |
| रात्रेः | रात्रि (६.१) | of the night |
| इव | इव | like |
| विपर्ययः | विपर्यय (१.१) | the opposite (i.e., the day) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रे | य | सो | ऽप्य | स्य | ते | ता | त |
| व | च | सो | ना | स्मि | भा | ज | नम् |
| न | भ | सः | स्फु | ट | ता | र | स्य |
| रा | त्रे | रि | व | वि | प | र्य | यः |
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