अन्वयः
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(तत् वचः) प्रसादरम्यम्, ओजस्वि, गरीयः, लाघवान्वितम्, साकाङ्क्षम्, अनुपस्कारम्, विष्वग्गति, निराकुलम् (च आसीत्)।
English Summary
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His speech was charming due to its clarity, powerful, profound yet concise, suggestive of deeper meaning, unadorned with superfluous words, comprehensive in scope, and free from confusion.
सारांश
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अर्जुन के वचन प्रसन्नतादायक, ओजस्वी, गौरवपूर्ण, संक्षिप्त, अर्थपूर्ण, स्पष्ट और व्याकुलता से रहित थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रसादेति॥ प्रसादोऽत्र प्रसिद्धार्थपदत्वं तेन रम्यम्।
प्रसिद्धार्थपदत्वं यत्स प्रसादो निगद्यते इति लक्षणात् । ओजस्वि समासभूयिष्ठम् । ओजः समासभूयस्त्वम् इति शासनात् । गरीयोऽर्थभयस्त्वपरिगतम् । न तु शब्दाडम्बरमात्रमित्यर्थः। लाघवान्वितं विस्तरदोषरहितम् । साकाङ्क्षमाकङ्क्षवत्पदकदम्बात्मकम् । न तु दशदाडिमादिवाक्यवदनाकङ्क्षितमित्यर्थ:। अनुपस्कारमध्याहारदोषरहितम्। विष्वग्गति कृत्स्नार्थप्रतिपादकम् । न तु सावशेषार्थमत एव निराकुलमसङ्कीर्णार्थम् ॥
पदच्छेदः
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| प्रसादरम्यम् | प्रसाद–रम्य (२.१) | charming with clarity |
| ओजस्वि | ओजस्विन् (२.१) | powerful |
| गरीयः | गरीयस् (२.१) | profound |
| लाघवान्वितम् | लाघव–अन्वित (२.१) | endowed with brevity |
| साकाङ्क्षम् | साकाङ्क्ष (२.१) | suggestive |
| अनुपस्कारम् | अनुपस्कार (२.१) | unadorned |
| विष्वग्गति | विष्वग्गति (२.१) | comprehensive |
| निराकुलम् | निराकुल (२.१) | unconfused |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | सा | द | र | म्य | मो | ज | स्वि |
| ग | री | यो | ला | घ | वा | न्वि | तम् |
| सा | का | ङ्क्ष | म | नु | प | स्का | रं |
| वि | ष्व | ग्ग | ति | नि | रा | कु | लम् |
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