अन्वयः
AI
यौवनश्रियः शरद्-अम्बुधर-च्छायाः इव गत्वर्यः सन्ति । विषयाः आपातरम्याः किन्तु पर्यन्तपरितापिनः भवन्ति ।
English Summary
AI
The splendors of youth are as fleeting as the shadows of autumn clouds. Sensual pleasures are delightful at first but cause suffering in the end.
सारांश
AI
युवावस्था का वैभव शरद ऋतु के बादलों की छाया के समान क्षणभंगुर है; सांसारिक विषय प्रारंभ में रमणीय परंतु अंत में दुखदायी होते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
शरदिति ॥ यौवनश्रियस्तावच्छरदम्बुधरच्छाया इव गत्वर्यश्चञ्चलाः । इति क्वरबन्तो निपातः।
टिडाणञ्- इत्यादिना ङीप् । विषयाः शब्दादयस्त्वापातरम्यास्तत्कालरमणीयाः। तदात्वे पात आपात: इति वैजयन्ती । पर्यन्तेऽवसाने परितापयन्ति दुःखं कुर्वन्तीति तथोक्ताः ॥
पदच्छेदः
AI
| शरदम्बुधरच्छायाः | शरद्–अम्बुधर–छाया (१.३) | like the shadows of autumn clouds |
| गत्वर्यः | गत्वरी (१.३) | transitory |
| यौवनश्रियः | यौवन–श्री (१.३) | the splendors of youth |
| आपातरम्याः | आपात–रम्य (१.३) | pleasing at first sight |
| विषयाः | विषय (१.३) | sensual pleasures |
| पर्यन्तपरितापिनः | पर्यन्त–परितापिन् (परि√तप्+णिनि, १.३) | causing pain in the end |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | र | द | म्बु | ध | र | च्छा | या |
| ग | त्व | र्यो | यौ | व | न | श्रि | यः |
| आ | पा | त | र | म्या | वि | ष | याः |
| प | र्य | न्त | प | रि | ता | पि | नः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.