अतिशयितवनान्तरद्युतीनां
फलकुसुमावचयेऽपि तद्विधानाम् ।
ऋतुरिव तरुवीरुधां समृद्ध्या
युवतिजनैर्जगृहे मुनिप्रभावः ॥
अतिशयितवनान्तरद्युतीनां
फलकुसुमावचयेऽपि तद्विधानाम् ।
ऋतुरिव तरुवीरुधां समृद्ध्या
युवतिजनैर्जगृहे मुनिप्रभावः ॥
फलकुसुमावचयेऽपि तद्विधानाम् ।
ऋतुरिव तरुवीरुधां समृद्ध्या
युवतिजनैर्जगृहे मुनिप्रभावः ॥
अन्वयः
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अतिशयित-वन-अन्तर-द्युतीनां तद्-विधानां युवति-जनैः फल-कुसुम-अवचये अपि तरु-वीरुधां समृद्ध्या ऋतुः इव मुनि-प्रभावः जगृहे।
English Summary
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Even as the young women, whose own splendor surpassed that of the forest, were gathering fruits and flowers, the sage's power was perceived by them through the extraordinary abundance of the trees and creepers, just as one perceives the presence of a season.
सारांश
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वृक्षों और लताओं में असमय आए फल-फूलों की समृद्धि को देखकर युवतियों ने मुनि के तप के प्रभाव को ऋतु के समान माना।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अतिशयितेति ॥ अतिशयितातिक्रान्ता बनान्तराणां द्युतिर्याभिस्तासाम् । कुतः। फलानां कुसुमानां चावचयेऽपि लवनेऽपि सैव विधा प्रकारो यासां तद्विधानाम् । तथैव समग्राणामित्यर्थः। तरूणां वीरुधां समृद्ध्या लिङ्गेन युवतिजनैर्मुनिप्रभावो ऋतुरिव जगृहे निश्चितः । कारणतयेति शेषः । उपमालंकारः॥
पदच्छेदः
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| अतिशयितवनान्तरद्युतीनाम् | अतिशयित (अति√शी+णिच्+क्त)–वन–अन्तर–द्युति (६.३) | of those whose splendor surpassed that of the forest |
| फलकुसुमावचये | फल–कुसुम–अवचय (७.१) | in the gathering of fruits and flowers |
| अपि | अपि | even |
| तद्विधानाम् | तद्विध (६.३) | of those kinds |
| ऋतुरिव | ऋतु–इव | like the season |
| तरुवीरुधाम् | तरु–वीरुध् (६.३) | of the trees and creepers |
| समृद्ध्या | समृद्धि (३.१) | by the abundance |
| युवतिजनैः | युवति–जन (३.३) | by the young women |
| जगृहे | जगृहे (√ग्रह् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was perceived |
| मुनिप्रभावः | मुनि–प्रभाव (१.१) | the power of the sage |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ति | श | यि | त | व | ना | न्त | र | द्यु | ती | नां | |
| फ | ल | कु | सु | मा | व | च | ये | ऽपि | त | द्वि | धा | नाम् |
| ऋ | तु | रि | व | त | रु | वी | रु | धां | स | मृ | द्ध्या | |
| यु | व | ति | ज | नै | र्ज | गृ | हे | मु | नि | प्र | भा | वः |
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