सचकितमिव विस्मयाकुलाभिः
शुचिसिकतास्वतिमानुषाणि ताभिः ।
क्षितिषु ददृशिरे पदानि जिष्णो-
रुपहितकेतुरथाङ्गलाञ्छनानि ॥
सचकितमिव विस्मयाकुलाभिः
शुचिसिकतास्वतिमानुषाणि ताभिः ।
क्षितिषु ददृशिरे पदानि जिष्णो-
रुपहितकेतुरथाङ्गलाञ्छनानि ॥
शुचिसिकतास्वतिमानुषाणि ताभिः ।
क्षितिषु ददृशिरे पदानि जिष्णो-
रुपहितकेतुरथाङ्गलाञ्छनानि ॥
अन्वयः
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अथ विस्मय-आकुलाभिः ताभिः शुचि-सिकतासु क्षितिषु जिष्णोः उपहित-केतु-रथ-अङ्ग-लाञ्छनानि अति-मानुषाणि पदानि स-चकितम् इव ददृशिरे।
English Summary
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Then, filled with wonder, the Apsaras saw on the pure, sandy grounds the superhuman footprints of Arjuna. Marked with the divine signs of the banner and the chariot-wheel, they gazed upon them as if with alarm.
सारांश
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उन्होंने निर्मल रेत पर ध्वज और चक्र के चिह्नों वाले अर्जुन के अलौकिक पदचिह्नों को आश्चर्य के साथ देखा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
सचकितमिति ॥ विस्सयाकुलाभिस्ताभिः स्त्रीभि: कर्त्रीभिः शुचयः सिकता यासु तासु । पादरेखाभिव्यक्तियोग्यास्वित्यर्थः । क्षितिषूपहितानि विन्यस्तानि केतुरथाङ्गलाञ्छनानि रेखास्वरूपध्वजचक्राण्येव चिह्नानि येषु तान्यत एवातिमानुषाणि जिष्णोरर्जुनस्य पदानि सचकितमिव सभयमिव यथा तथा दद्दशिरे दृष्टानि । अद्भुतवस्तुदर्शनाद्भयविस्मयौ भवत इति भावः ॥
पदच्छेदः
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| सचकितमिव | सचकितम्–इव | as if with alarm |
| विस्मयाकुलाभिः | विस्मय–आकुल (३.३) | by those who were filled with wonder |
| शुचिसिकतासु | शुचि–सिकता (७.३) | on the pure sands |
| अतिमानुषाणि | अतिमानुष (२.३) | superhuman |
| ताभिः | तद् (३.३) | by them |
| क्षितिषु | क्षिति (७.३) | on the grounds |
| ददृशिरे | ददृशिरे (√दृश् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | were seen |
| पदानि | पद (२.३) | footprints |
| जिष्णोः | जिष्णु (६.१) | of Jishnu (Arjuna) |
| उपहितकेतुरथाङ्गलाञ्छनानि | उपहित (उप√धा+क्त)–केतु–रथ–अङ्ग–लाञ्छन (२.३) | marked with the signs of the banner and the chariot-wheel |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | च | कि | त | मि | व | वि | स्म | या | कु | ला | भिः | |
| शु | चि | सि | क | ता | स्व | ति | मा | नु | षा | णि | ता | भिः |
| क्षि | ति | षु | द | दृ | शि | रे | प | दा | नि | जि | ष्णो | |
| रु | प | हि | त | के | तु | र | था | ङ्ग | ला | ञ्छ | ना | नि |
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