नृपतिमुनिपरिग्रहेण सा भूः
सुरसचिवाप्सरसां जहार चेतः ।
उपहितपरमप्रभावधाम्नां
न हि जयिनां तपसामलङ्घ्यमस्ति ॥
नृपतिमुनिपरिग्रहेण सा भूः
सुरसचिवाप्सरसां जहार चेतः ।
उपहितपरमप्रभावधाम्नां
न हि जयिनां तपसामलङ्घ्यमस्ति ॥
सुरसचिवाप्सरसां जहार चेतः ।
उपहितपरमप्रभावधाम्नां
न हि जयिनां तपसामलङ्घ्यमस्ति ॥
अन्वयः
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नृपति-मुनि-परिग्रहेण सा भूः सुर-सचिव-अप्सरसां चेतः जहार। हि उपहित-परम-प्रभाव-धाम्नां जयिनां तपसाम् अलङ्घ्यं न अस्ति।
English Summary
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That land, occupied by the royal sage Arjuna, captivated the minds of the Apsaras. Indeed, for the victorious who are abodes of supreme, inherent power, there is nothing that cannot be achieved by their austerities.
सारांश
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उस राजा और मुनि के संपर्क वाली भूमि ने अप्सराओं का मन मोह लिया; तेजस्वी तपस्वियों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
नृपतिमुनिपरिग्रहेणेति ॥ सा भूर्नृपतिरेव मुनिस्तस्य परिग्रहेणाधिष्ठानेन हेतुना सुरसचिवानां गन्धर्वाणामप्सरसां च तेजो जहार । तदाश्रमप्रवेशादेव निस्तेजस्का अभूवन्नित्यर्थः । ननु कथं मानुषेण तेजसामानुषं तेजो निरस्तमित्याशङ्क्याह-हि यस्मादुपहित आहिते परमे प्रभावधाम्नी सामर्थ्यतेजसी येषां तेषां जयिनां जयनशीलानाम् ।
महताम् इति पाठे महत्तामुत्कटानाम् । तपसामलङ्घ्यं नास्ति । किमप्यसाध्यं नास्तीति भावः ॥
पदच्छेदः
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| नृपतिमुनिपरिग्रहेण | नृपति–मुनि–परिग्रह (३.१) | by its occupation by the royal sage |
| सा | तद् (१.१) | that |
| भूः | भू (१.१) | land |
| सुरसचिवाप्सरसाम् | सुर–सचिव–अप्सरस् (६.३) | of the Apsaras, the counselors of the gods |
| जहार | जहार (√हृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | captivated |
| चेतः | चेतस् (२.१) | the mind |
| उपहितपरमप्रभावधाम्नाम् | उपहित (उप√धा+क्त)–परम–प्रभाव–धामन् (६.३) | of those who are the abode of supreme, inherent power |
| न | न | not |
| हि | हि | indeed |
| जयिनाम् | जयिन् (६.३) | of the victorious ones |
| तपसाम् | तपस् (६.३) | of austerities |
| अलङ्घ्यम् | अलङ्घ्य (√लङ्घ्+यत्, १.१) | anything that cannot be surpassed |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नृ | प | ति | मु | नि | प | रि | ग्र | हे | ण | सा | भूः | |
| सु | र | स | चि | वा | प्स | र | सां | ज | हा | र | चे | तः |
| उ | प | हि | त | प | र | म | प्र | भा | व | धा | म्नां | |
| न | हि | ज | यि | नां | त | प | सा | म | ल | ङ्घ्य | म | स्ति |
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