भृशकुसुमशरेषुपातमोहा-
दनवसितार्थपदाकुलोऽभिलापः ।
अधिकविततलोचनं वधूना-
मयुगपदुन्नमितभ्रु वीक्षितं च ॥

अन्वयः AI वधूनां भृश-कुसुम-शर-इषु-पात-मोहात् अनवसित-अर्थ-पद-आकुलः अभिलापः, च अधिक-वितत-लोचनम् अयुगपत्-उन्नमित-भ्रु वीक्षितं (भूषाम् इयाय) ।
English Summary AI The women's speech, confused with incomplete but meaningful words due to the delusion caused by the intense shower of Kamadeva's arrows, and their glances, with eyes wide open and one eyebrow raised, also became their adornments.
सारांश AI कामदेव के पुष्प-बाणों के प्रहार से उत्पन्न मोह के कारण अप्सराओं के वचन अर्थहीन और अव्यवस्थित हो गए। उनके नेत्र अधिक फैल गए और वे असमान रूप से भौंहें उठाकर कटाक्षपूर्ण दृष्टि से देखने लगीं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) भृशेति ॥ तथा भृशेन गाढेन कुसुमशरस्य कामस्येषोर्निपातेन यो मोहो मूर्च्छा तस्माद्धेतोरनवसितार्थैरस्फुटोच्चारणादनवधारिताभिधेयैः पदैः सुप्तिङन्तशब्दैराकुलः संकीर्णोऽभिलापो वाक्यप्रयोगश्चाधिकं वितते विस्तृते लोचने यस्मिम्स्तदयुगपत्पर्यायेणोन्नमिते भ्रुवौ यस्मिम्स्तत्तथोक्तम् । ह्रस्वो नपुंसके प्रातिपदिकस्य (अष्टाध्यायी १.२.४७ ) इति ह्र्स्वः । वीक्षितं वीक्षणं च ॥
पदच्छेदः AI
भृशकुसुमशरेषुपातमोहात्भृशकुसुमशरइषुपातमोह (५.१) due to the delusion from the intense fall of Kamadeva's arrows
अनवसितार्थपदाकुलःअनवसितअर्थपदआकुल (१.१) confused with incomplete, meaningful words
अभिलापःअभिलाप (१.१) the speech
अधिकविततलोचनम्अधिकवितत–लोचनम् (१.१) with eyes wide open
वधूनाम्वधू (६.३) of the women
अयुगपदुन्नमितभ्रुअयुगपत्उन्नमितभ्रु (१.१) in which one eyebrow was raised
वीक्षितम्वीक्षित (१.१) the glance
and
छन्दः पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३
भृ कु सु रे षु पा मो हा
सि ता र्थ दा कु लो ऽभि ला पः
धि वि लो नं धू ना
यु दु न्न मि भ्रु वी क्षि तं
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