इति विषमितचक्षुषाभिधाय
स्फुरदधरोष्ठमसूयया कयाचित् ।
अगणितगुरुमानलज्जयासौ
स्वयमुरसि श्रवणोत्पलेन जघ्ने ॥
इति विषमितचक्षुषाभिधाय
स्फुरदधरोष्ठमसूयया कयाचित् ।
अगणितगुरुमानलज्जयासौ
स्वयमुरसि श्रवणोत्पलेन जघ्ने ॥
स्फुरदधरोष्ठमसूयया कयाचित् ।
अगणितगुरुमानलज्जयासौ
स्वयमुरसि श्रवणोत्पलेन जघ्ने ॥
अन्वयः
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इति असूयया विषमित-चक्षुषा स्फुरत्-अधर-ओष्ठम् अभिधाय, कयाचित् अगणित-गुरु-मान-लज्जया असौ स्वयम् उरसि श्रवण-उत्पलेन जघ्ने ।
English Summary
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Having spoken thus with a jealous, sidelong glance that made her lower lip throb, he (Arjuna) was struck on the chest with a lotus from her ear by a certain woman who had cast aside all regard for elders, pride, and shame.
सारांश
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तिरछी दृष्टि और कांपते होठों से ऐसा कहकर, ईर्ष्या के वश में उस सुन्दरी ने लज्जा त्यागकर अपने कान के कमल से अपने ही हृदय पर प्रहार किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
इतीति ॥ इतीत्थमसूयया मत्सरेण स्फुरन्नधरोष्ठो यस्मिन्कर्मणि तद्यथा तथाभिधायोक्त्वा विषमितचक्षुषा कुटिलीकृतदृष्ट्यागणिता गुरव आचार्यादयो मानोऽभिमानो लज्जा च यया तया कयाचिदसौ मुनिरुरसि स्वयं स्वहस्तेनैव श्रवणोत्पलेन जघ्ने हतः।
पदच्छेदः
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| इति | इति | thus |
| विषमितचक्षुषा | विषमित–चक्षुस् (३.१) | with a sidelong glance |
| अभिधाय | अभिधाय (अभि√धा+ल्यप्) | having said |
| स्फुरदधरोष्ठम् | स्फुरत्–अधरोष्ठम् | so that the lower lip throbbed |
| असूयया | असूया (३.१) | with jealousy |
| कयाचित् | किञ्चित् (३.१) | by a certain woman |
| अगणितगुरुमानलज्जया | अगणित–गुरु–मान–लज्जा (३.१) | by her who had disregarded elders, pride, and shame |
| असौ | अदस् (१.१) | he |
| स्वयम् | स्वयम् | (by her) own |
| उरसि | उरस् (७.१) | on the chest |
| श्रवणोत्पलेन | श्रवण–उत्पल (३.१) | with the lotus from her ear |
| जघ्ने | जघ्ने (√हन् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was struck |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | वि | ष | मि | त | च | क्षु | षा | भि | धा | य | |
| स्फु | र | द | ध | रो | ष्ठ | म | सू | य | या | क | या | चित् |
| अ | ग | णि | त | गु | रु | मा | न | ल | ज्ज | या | सौ | |
| स्व | य | मु | र | सि | श्र | व | णो | त्प | ले | न | ज | घ्ने |
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