अन्वयः
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अन्या, विगलित-नीवि विलोलम् अन्तरीयं सरभसम् अवलम्ब्य, अभिपतितु-मनाः, ससाध्वसा इव, च्युत-रशना-गुणेन संदिता (सती) अवतस्थे ।
English Summary
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Another woman, hastily holding her fluttering blue lower garment whose knot had come undone, stood still as if with fear, with a mind to rush towards him, her garment held together only by the fallen girdle-string.
सारांश
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एक अन्य स्त्री का वस्त्र और करधनी खिसक जाने पर, वह लज्जा और घबराहट में अपनी ही करधनी के जाल में बँधकर जड़वत खड़ी रह गई।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
सरमसमिति ॥ अन्यापरा विगलितनीवि श्लथवन्धनमत एव विलोलं स्थानचलितम्। नील्या रक्तं नीलम् ।
नील्या अन्वक्तव्यः इत्यन्प्रत्ययः । अन्तरीयं परिधानमवलम्ब्य हस्तेन गृहीत्वा सरभसं सत्वरमभिपतितुं मनो यस्याः सा तथोक्ता । गन्तुमुद्युक्तेत्यर्थः। तथापि ससाध्वसेव । न तु वस्तुतः ससाध्वसा । किं तु च्युतेन गलितेनरशनागुणेन संदिता बद्धा सत्यवतस्थे स्थिता। बद्धे संदानितं मूतमुदितं संदितं सितम् इत्यमरः । कर्मणि क्तः । द्यतिस्यतिमास्थाम्- इतीकारः ॥ काचिद्युग्मेनाह
पदच्छेदः
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| सरभसम् | सरभसम् | hastily |
| अवलम्ब्य | अवलम्ब्य (अव√लम्ब्+ल्यप्) | holding |
| नीलम् | नील (२.१) | the blue garment |
| अन्या | अन्य (१.१) | another woman |
| विगलितनीवि | विगलित–नीवि (२.१) | from which the knot was loosened |
| विलोलम् | विलोल (२.१) | fluttering |
| अन्तरीयम् | अन्तरीय (२.१) | lower garment |
| अभिपतितुमनाः | अभिपतितुम्–मनस् (१.१) | with a mind to rush towards him |
| ससाध्वसा | ससाध्वसा (१.१) | with fear |
| इव | इव | as if |
| च्युतरशनागुणसंदिता | च्युत–रशनागुण–संदिता (१.१) | held together by the fallen girdle-string |
| अवतस्थे | अवतस्थे (अव√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she stood |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र | भ | स | म | व | ल | म्ब्य | नी | ल | म | न्या | |
| वि | ग | लि | त | नी | वि | वि | लो | ल | म | न्त | री | यम् |
| अ | भि | प | ति | तु | म | नाः | स | सा | ध्व | से | व | |
| च्यु | त | र | श | ना | गु | ण | सं | दि | ता | व | त | स्थे |
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