नृपसुतमभितः समन्मथायाः
परिजनगात्रतिरोहिताङ्गयष्टेः ।
स्फुटमभिलषितं बभूव वध्वा
वदति हि संवृतिरेव कामितानि ॥
नृपसुतमभितः समन्मथायाः
परिजनगात्रतिरोहिताङ्गयष्टेः ।
स्फुटमभिलषितं बभूव वध्वा
वदति हि संवृतिरेव कामितानि ॥
परिजनगात्रतिरोहिताङ्गयष्टेः ।
स्फुटमभिलषितं बभूव वध्वा
वदति हि संवृतिरेव कामितानि ॥
अन्वयः
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नृपसुतम् अभितः परिजनगात्रतिरोहिताङ्गयष्टेः समन्मथायाः वध्वाः अभिलषितं स्फुटं बभूव। हि संवृतिः एव कामितानि वदति।
English Summary
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The desire of a certain love-struck woman, who tried to conceal her slender form behind her attendants while looking towards the prince, became obvious. For indeed, the very act of concealment reveals one's desires.
सारांश
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अर्जुन के निकट अपनी सखियों के पीछे अंगों को छिपाने का प्रयास करती हुई उस नवयौवना की लज्जा ने ही उसके मन की काम-इच्छा को स्पष्ट रूप से प्रकट कर दिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
नृपेति ॥ नृपसुतमर्जुनमभितः संमुखं परिजनस्य सखीजनस्य गात्रेण तिरोहिता लज्जया स्वाकारगोपनायान्तर्हिताङ्ग्यष्टिर्यस्याः सा तस्याः समन्मथाया वध्वा अमिलषितं मुनिं प्रत्यनुरागः स्फुटं बभूव । न च संव्रियमाणस्याभिव्यक्तिर्विरुद्धेति वाच्यमित्याहयतः संवृतिः सम्यग्गोपनमेव कामितान्यनुरागान् । कामयतेर्भावे क्तः । वदति हि । प्रकटयतीत्यर्थः । अयमनुरागस्य स्वभाव उक्तः । यया चेष्टया रागः संव्रियते सैवास्य प्रकाशिका जातेति भावः ॥
पदच्छेदः
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| नृपसुतम् | नृप–सुत (२.१) | the prince |
| अभितः | अभितस् | towards |
| समन्मथायाः | समन्मथ (६.१) | of her who was filled with love |
| परिजनगात्रतिरोहिताङ्गयष्टेः | परिजन–गात्र–तिरोहित–अङ्गयष्टि (६.१) | of her whose slender body was concealed by the bodies of her attendants |
| स्फुटम् | स्फुट (१.१) | evident |
| अभिलषितम् | अभिलषित (१.१) | The desire |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| वध्वाः | वधू (६.१) | of the woman |
| वदति | वदति (√वद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reveals |
| हि | हि | For indeed |
| संवृतिः | संवृति (१.१) | concealment |
| एव | एव | itself |
| कामितानि | कामित (२.३) | desires |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नृ | प | सु | त | म | भि | तः | स | म | न्म | था | याः | |
| प | रि | ज | न | गा | त्र | ति | रो | हि | ता | ङ्ग | य | ष्टेः |
| स्फु | ट | म | भि | ल | षि | तं | ब | भू | व | व | ध्वा | |
| व | द | ति | हि | सं | वृ | ति | रे | व | का | मि | ता | नि |
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