अविरलमलसेषु नर्तकीनां द्रुतपरिषिक्तमलक्तकं पदेषु । सवपुषामिव चित्तरागमूहुर्नमितशिखानि कदम्बकेसराणि ॥
अविरलमलसेषु नर्तकीनां द्रुतपरिषिक्तमलक्तकं पदेषु । सवपुषामिव चित्तरागमूहुर्नमितशिखानि कदम्बकेसराणि ॥
अन्वयः
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नमितशिखानि कदम्बकेसराणि नर्तकीनाम् अलसेषु पदेषु अविरलं द्रुतपरिषिक्तम् अलक्तकं सवपुषां चित्तरागम् इव ऊहुः।
English Summary
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The filaments of Kadamba flowers, with their tips bent, fell upon the languid feet of the dancing girls. There, they clung to the freshly applied red lac dye, appearing as if they were the embodied passion of the nymphs' hearts made visible.
सारांश
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नर्तकियों के सुकुमार चरणों पर लगा सघन महावर उनके शरीर में व्याप्त अनुराग के समान प्रतीत हो रहा था, जैसे कदम्ब के झुके हुए केसर शोभायमान हों।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अविरलमिति ॥ नमितशिखानि नर्तकीपादपीडनान्नमिताग्राणि कदम्बकेसराणि। रङ्गपूजादत्तानीति शेषः । अविरलं सान्द्रं यथा तथा द्रुतो रागोष्मणा विगलितोऽत एव परिषिक्तः प्रसृतस्तं द्रुतपरिषिक्तं नर्तकीनामलसेषु पदेषु पादन्यासेष्वलक्तकं लाक्षारागं सवपुषं मूर्तिमन्तं चित्तरागमुत्कटतया कायाद्बहिर्निःसृतं मुनिविषयकं रागमिवेत्युत्प्रेक्षा । ऊहुर्वहन्ति स्म । अथासां शृङ्गारचेष्टां कथयति
पदच्छेदः
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| अविरलम् | अविरलम् | densely |
| अलसेषु | अलस (७.३) | on the languid |
| नर्तकीनाम् | नर्तकी (६.३) | of the dancing girls |
| द्रुतपरिषिक्तम् | द्रुत–परिषिक्त (२.१) | quickly sprinkled |
| अलक्तकम् | अलक्तक (२.१) | the red lac dye |
| पदेषु | पद (७.३) | feet |
| सवपुषाम् | सवपुस् (६.३) | of those having bodies (embodied) |
| इव | इव | as if |
| चित्तरागम् | चित्त–राग (२.१) | the passion of the heart |
| ऊहुः | ऊहुः (√वह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | bore |
| नमितशिखानि | नमित–शिखा (१.३) | with bent tips |
| कदम्बकेसराणि | कदम्ब–केसर (१.३) | The filaments of the Kadamba flowers |
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