अन्वयः
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अभिनयमनसः सुराङ्गनायाः निहितमलक्तकवर्तनाभिताम्रं चरणं धुतनवलोहितपङ्कजाभिशङ्का षट्पदाली अभिपपात।
English Summary
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A swarm of bees, mistaking it for a freshly shaken red lotus, flew towards the foot of a celestial nymph. Her foot was reddish from the application of lac dye, and her mind was supposed to be on her dance performance.
सारांश
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अभिनय के लिए उद्यत एक अप्सरा के लाक्षारस से रंगे लाल चरणों को नवीन लाल कमल समझकर भ्रमरों का समूह उन पर मंडराने लगा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अभिनयेति ॥ अभिनयो रसभावादिव्यञ्जकचेष्टाविशेषः ।
व्यञ्जकाभिनयौ समौ इत्यमरः (अमरकोशः १.७.१७ ) । तत्र मनो यस्यास्तस्याः । व्यासङ्गाद्भृङ्गापातमजानत्या इत्यर्थः । सुराङ्गनाया: संवन्ध्यलक्तकवर्तनया लाक्षारसरञ्जनेनाभिताम्रं निहितं न्यस्तं चरणं षट्पदाली कर्त्री धृता नवलोहितपङ्कजानामभिशङ्का प्रत्यग्रकोकनदभ्रमो यया साभिपपाताभिधावति स्म । अत्र षट्पदाल्याः स्त्रीचरणे पङ्कजभ्रमाभिधानाद्भ्रान्तिमदलंकारः । तेन चोपमा व्यञ्जत इत्यलंकारेणालंकारध्वनिः ॥
पदच्छेदः
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| अभिनयमनसः | अभिनय–मनस् (६.१) | of her whose mind was on the performance |
| सुराङ्गनायाः | सुर–अङ्गना (६.१) | of the celestial woman |
| निहितमलक्तकवर्तनाभिताम्रम् | निहित–अलक्तक–वर्तन–अभिताम्र (२.१) | made reddish all around by the application of red lac dye |
| चरणम् | चरण (२.१) | the foot |
| अभिपपात | अभिपपात (अभि√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | flew towards |
| षट्पदाली | षट्पद–आली (१.१) | A swarm of bees |
| धुतनवलोहितपङ्कजाभिशङ्का | धुत–नव–लोहित–पङ्कज–अभिशङ्का (१.१) | mistaking it for a freshly shaken red lotus |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भि | न | य | म | न | सः | सु | रा | ङ्ग | ना | या | |
| नि | हि | त | म | ल | क्त | क | व | र्त | ना | भि | ता | म्रम् |
| च | र | ण | म | भि | प | पा | त | ष | ट्प | दा | ली | |
| धु | त | न | व | लो | हि | त | प | ङ्क | जा | भि | श | ङ्का |
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